बिहार में जमीन के पुराने दस्तावेज पढ़ने की समस्या खत्म…सरकार करने जा रही है बड़ी प्लानिंग

Bihar news : जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और समझने में आम लोगों को आ रही भारी परेशानियों को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब कैथी लिपि में लिखे खतियान, लगान रसीद और बंदोबस्ती के कागजातों को डिकोड करने के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए जल्द ही कैथी लिपि विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जाएगा. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि विभाग की ओर से विशेषज्ञों को विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि आम रैयतों को जमीन से जुड़े कार्यों में अब भटकना न पड़े.

पुराने दस्तावेज बने परेशानी की जड़

राज्य के राजस्व अभिलेखागारों में सुरक्षित अधिकांश पुराने दस्तावेज, जैसे कि खतियान, लगान रसीद, जमाबंदी और बंदोबस्ती के कागजात कैथी लिपि में लिखे गए हैं. समय के साथ इस लिपि के जानकारों की संख्या बेहद कम हो गई है. परिणामस्वरूप आज स्थिति यह है कि दाखिल-खारिज की फाइलें महीनों तक लटकी रहती हैं, भूमि सर्वेक्षण में रैयत अपने ही पुरखों की जमीन साबित नहीं कर पा रहे और दस्तावेजों का मिलान नहीं हो पाने से विवाद बढ़ रहे हैं. कई जिलों से यह शिकायत सामने आ रही है कि लिपि न समझ पाने का फायदा उठाकर बिचौलिए और कुछ भ्रष्ट कर्मी लोगों को गुमराह कर रहे हैं और मोटी रकम वसूली जा रही है.

सर्वे कार्य में रैयतों की बढ़ी मुश्किलें

राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण अभियान के दौरान हजारों रैयतों को अपने पुराने कागजात पेश करने पड़ रहे हैं. लेकिन खतियान और जमाबंदी की भाषा न समझ पाने के कारण लोग असमंजस में हैं. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है. कई जगह बुजुर्गों के पास मौजूद सौ-सवा सौ साल पुराने कागजात आज किसी के भी पढ़ने लायक नहीं बचे हैं. ऐसे में लोग अपने हक की जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

विशेषज्ञ पैनल से मिलेगा समाधान

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार अब कैथी लिपि विशेषज्ञों का एक अधिकृत पैनल तैयार करेगी, जिन्हें विभाग द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा. ये विशेषज्ञ आम लोगों को बहुत ही कम और किफायती दरों पर सेवाएं उपलब्ध कराएंगे. उन्होंने कहा कि कैथी लिपि के जानकारों की कमी के कारण अक्सर विवाद और देरी की शिकायतें मिलती थीं. अब विशेषज्ञों की मदद से लोगों को उनके दस्तावेजों का सटीक और प्रमाणिक अनुवाद मिलेगा.राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से भूमि सर्वेक्षण का कार्य समय पर पूरा होगा, दाखिल-खारिज और जमाबंदी में पारदर्शिता आएगी, भू-माफियाओं और दलालों पर लगाम लगेगी. उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार भू-माफियाओं और विभागीय शिथिलता के खिलाफ सख्त है और यह कदम रैयतों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है.

अब नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि हम जमीन से जुड़े विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. कैथी लिपि विशेषज्ञों के आने से आम आदमी को अपने हक की जमीन के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. राज्य सरकार के इस फैसले से उन लाखों रैयतों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से अपने ही पुश्तैनी कागजात पढ़वाने के लिए इधर-उधर भटक रहे थे. अब जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

सोर्स : मीडिया रिपोर्ट

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