अदालत को नहीं किया जा सकता बुलडोज…राबड़ी देवी की ट्रांसफर याचिका पर CBI का कड़ा विरोध

land-for-jobs case : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की उस याचिका का कड़ा विरोध किया, जिसमें उन्होंने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत से जुड़े मामलों को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। CBI ने दिल्ली की एक अदालत में दलील दी कि यह याचिका फोरम शॉपिंग का प्रयास है और इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना तथा न्यायाधीश की छवि को धूमिल करना है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट के समक्ष पेश होते हुए CBI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.पी. सिंह ने कहा कि ट्रांसफर याचिका में न्यायपालिका पर निराधार आरोप लगाए गए हैं और यह ट्रायल कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी आरोपी को सिर्फ इसलिए मुकदमे का मंच बदलने का अधिकार नहीं है, क्योंकि कार्यवाही उसके पक्ष में नहीं चल रही।

CBI ने क्या कहा

सिंह ने अदालत में कहा कि आप अदालत को बुलडोज नहीं कर सकते। आप फोरम शॉपिंग नहीं कर सकते। आप किसी जज को बदनाम नहीं कर सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा हमला हैं। CBI के वकील ने दलील दी कि विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उच्च अदालतों द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं और स्थापित न्यायिक परंपराओं के अनुरूप ही काम किया है। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर याचिका एक अहम मोड़ पर ट्रायल को पटरी से उतारने और देरी कराने के इरादे से दायर की गई है।

राबड़ी देवी की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि IRCTC भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने के आदेश को जानबूझकर बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता से जोड़ने के लिए टाल दिया गया। इस पर CBI ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने केवल जांच एजेंसी से कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे, जो न्यायाधीश का संवैधानिक और न्यायिक दायित्व है। CBI की ओर से कहा गया कि ये स्पष्टीकरण अदालत की स्पष्टता और संतुष्टि के लिए मांगे गए थे। सवाल पूछना जज का कर्तव्य है।

15 दिसंबर को मामले की अगली सुनवाई

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 दिसंबर 2025 की तारीख तय की है। अपनी याचिका में राबड़ी देवी ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष लंबित चार मामलों को स्थानांतरित करने की मांग की है। इन मामलों में वह स्वयं और उनके परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं। इनमें IRCTC घोटाला, कथित जमीन के बदले नौकरी मामला (लैंड-फॉर-जॉब्स) और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले शामिल हैं।

लालू परिवार के खिलाफ आपराधिक आरोप तय !

गौरतलब है कि इससे पहले 13 अक्टूबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने IRCTC मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए थे। राबड़ी देवी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि विशेष न्यायाधीश पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और पहले से तय मानसिकता के साथ मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जज अभियोजन पक्ष के प्रति अनुचित रूप से झुके हुए हैं, जिससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उचित आशंका पैदा होती है। वहीं, CBI ने इन आरोपों को अदालत को बदनाम करने और ट्रायल में देरी करने की कोशिश बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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