बिहार-बंगाल में विपक्ष के वोट बैंक पर भाजपा की नजर..! नया राज्य बना तो कौन जिले होंगे शामिल, समझिए क्या होगा गुणा-गणित ?

New State Bihar Bengal : केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के तीन दिवसीय बिहार दौरे के बीच एक नई राजनीतिक बहस ने जोर पकड़ लिया है. चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या बिहार के सीमांचल क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है. हालांकि इस संबंध में अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

कैसे शुरू हुई बहस?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक रणविजय साहू ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह का बिहार दौरा सीमांचल क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों के संभावित पुनर्गठन से जुड़ा हो सकता है. साहू ने आरोप लगाया कि यदि ऐसा कदम उठाया जाता है तो इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम आबादी अधिक है. उनके अनुसार, इस संभावित पुनर्गठन से बिहार में Rashtriya Janata Dal और पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ सकता है.

किन जिलों का नाम आ रहा है?

दावे के मुताबिक जिन छह जिलों की चर्चा हो रही है, वे भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इसमें किशनगंज,पूर्णिया और कटिहार बिहार के संभावित जिले हैं, जबकि उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के संभावित जिले हैं, जिसको अलग कर नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है. इन जिलों का भौगोलिक महत्व भी है. उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर सीधे बिहार की सीमा से लगते हैं, जबकि दार्जिलिंग की सीमाएं बिहार के किशनगंज से जुड़ती हैं. यह पूरा क्षेत्र रणनीतिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है.

छह जिलों में जनसंख्या का क्या है गणित

बहस का एक बड़ा आधार इन जिलों की धार्मिक जनसंख्या संरचना को लेकर है. इन छह जिलों की जनसंख्या गणित को समझे तो…

  • किशनगंज (बिहार): मुस्लिम बहुल जिला, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 68% बताई जाती है.
  • पूर्णिया (बिहार): हिंदू बहुल, लेकिन मुस्लिम आबादी लगभग 38% के आसपास.
  • कटिहार (बिहार): मिश्रित आबादी, हिंदू बहुल.
  • उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल): हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर.
  • दक्षिण दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल): हिंदू बहुल जिला.
  • दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल): बहुधार्मिक जिला, जहां हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है. यह जिला पहले भी अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर चर्चा में रहा है.

ध्यान देने योग्य है कि सभी छह जिले मुस्लिम बहुल नहीं हैं. केवल किशनगंज और उत्तर दिनाजपुर में मुस्लिम आबादी का अनुपात अधिक या लगभग बराबरी का है, जबकि अन्य जिलों में हिंदू आबादी बहुमत में है.

क्या हो सकता है राजनीतिक असर ?

रणविजय साहू का कहना है कि यदि इन जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाता है, तो बिहार और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं में इन क्षेत्रों का मौजूदा प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा. इससे दोनों राज्यों के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य पुनर्गठन का मुद्दा भारत में नया नहीं है. 1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग से लेकर झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्यों के गठन तक, देश में प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से सीमाओं में बदलाव होते रहे हैं. हालांकि किसी भी नए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के गठन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया और संसद की मंजूरी आवश्यक होती है.

औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है सामने

हालांकि अब तक केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे का आधिकारिक एजेंडा विकास योजनाओं की समीक्षा और संगठनात्मक बैठकों को बताया गया है. फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है. सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है. आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई स्पष्ट संकेत मिलता है, तो यह बिहार और पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *