Parliament expansion : केंद्र सरकार लोकसभा की सीटों में बड़े विस्तार और महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू करने की प्रक्रिया को अलग-अलग तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर विचार कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आगामी जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से महिला आरक्षण को अलग करने का विकल्प तलाशा जा रहा है. इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने की संभावना जताई गई है. इनमें से लगभग एक-तिहाई, यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं. नई व्यवस्था को 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू किए जाने की बात सामने आ रही है.
बड़े राज्यों में सीटों का संभावित बंटवारा
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने विपक्षी दलों के साथ चर्चा में सुझाव दिया है कि सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जाए, लेकिन राज्यों के बीच मौजूदा सीट अनुपात को बरकरार रखा जाए. परिसीमन की प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर होने की संभावना है. यदि मौजूदा अनुपात कायम रहता है, तो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो सकती है, जिनमें 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
- महाराष्ट्र: 48 से बढ़कर 72 सीटें (24 महिला आरक्षित)
- पश्चिम बंगाल: 42 से बढ़कर 63 सीटें (21 महिला आरक्षित)
- बिहार: 40 से बढ़कर 60 सीटें (20 महिला आरक्षित)
- तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीटें (20 महिला आरक्षित)
- मध्य प्रदेश: 29 से बढ़कर 44 सीटें (15 महिला आरक्षित)
- अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा: 2 से बढ़कर 3 सीटें
- मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम: 1 से बढ़कर 2 सीटें
- दिल्ली: 7 से बढ़कर 11 सीटें (4 महिला आरक्षित)
- जम्मू-कश्मीर: 5 से बढ़कर 8 सीटें (3 महिला आरक्षित)
हालांकि, लद्दाख और पुडुचेरी जैसे उन केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है, जहां वर्तमान में केवल एक-एक सीट है.
क्या है आगे का रास्ता?
यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चर्चा के चरण में है और अंतिम निर्णय जनगणना, परिसीमन और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा. यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह भारत की संसदीय संरचना में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.