Delimitation impact on Bihar : देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है, जिसका सीधा असर बिहार पर भी पड़ सकता है. केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए जा रहे नए प्लान के तहत बिहार की लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 की जा सकती है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्य को 20 अतिरिक्त सांसद मिलेंगे, जिससे उसकी राजनीतिक ताकत और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
महिला आरक्षण कानून से जुड़ा है पूरा मामला
यह संभावित बदलाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) से जुड़ा हुआ है, जिसे सितंबर 2023 में संसद ने पारित किया था. इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी गई थीं. पहला है नई जनगणना कराई जाएगी और दूसरा है नई जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) किया जाए. हालांकि इन शर्तों के कारण यह माना जा रहा था कि महिला आरक्षण 2029 या उसके बाद ही लागू हो पाएगा.
सरकार की नई रणनीति
इन शर्तों से इतर अब केंद्र सरकार इस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है और इसके लिए ही सदन में दो प्रमुख बदलावों पर विचार किया जा रहा है. नए बदलाव में सरकार का कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कराया जाए. इसके साथ साथ महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग कर जल्द लागू किया जाए. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अगर ऐसा होता है, तो लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी और इसमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
बिहार को कैसे होगा फायदा?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बिहार उस राज्य में शामिल हो जाएगा जिसको अधिक लाभ मिलेगा. बिहार की लोकसभा सीटों में 50% तक बढ़ोतरी हो जाएगी. फिलहाल बिहार की लोकसभा सीटें 40 है जो बढ़कर 60 हो सकती हैं. यानी लगभग 50% की वृद्धि होगी. बिहार देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है, लेकिन सीटों की संख्या लंबे समय से स्थिर है. नई व्यवस्था से आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व बेहतर होगा. अधिक सांसद होने का एक मतलब यह भी है कि बिहार के मुद्दे संसद में अधिक प्रभावी ढंग से उठाए जा सकेंगे. सीटें बढ़ने का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि छोटे क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे अधिक मजबूती से उठेंगे.
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव तय
सीटों की संख्या बढ़ने से राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जैसे कि नए संसदीय क्षेत्र (कंस्टीट्यूएंसी) बनेंगे, नए नेताओं का उभार होगा और पुराने राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. क्षेत्रीय दलों जैसे जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.
महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
वहीं महिला आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. जिससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को राजनीति में आने का मौका मिलेगा और संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी.
दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा
हालांकि परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं. दक्षिणी राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ने से उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है. इस चिंता को दूर करने के लिए सरकार मौजूदा अनुपात के हिसाब से सीटें बढ़ाने पर विचार कर रही है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार इस प्रस्ताव को संसद से पारित करवा पाती है, क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह बदलाव लागू हो पाता है. अगर यह योजना सफल होती है, तो बिहार की राजनीति के साथ साथ देश की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है, जो देश में क्षेत्रीय राजनीतिक प्रभाव को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई दे सकता है.