बकरीद पर कुर्बानी का बाजार…भारत में हर साल कितने बकरे कटते हैं, समझिए कितना बड़ा है मीट इंडस्ट्री का कारोबार?

India Meat Production Data : पश्चिम बंगाल में बकरीद के मौके पर पशुओं की कुर्बानी को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है. राज्य सरकार की ओर से पुराने नियमों को सख्ती से लागू करने की घोषणा के बाद एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिल रही है. मामला अदालत तक पहुंच चुका है और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है. इसी बहस के बीच लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है, भारत में आखिर बकरीद के दौरान कितने जानवरों, खासकर बकरों की कुर्बानी दी जाती है? इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट्स, बाजार के डेटा और मीट इंडस्ट्री के आंकड़े इस विशाल कारोबार की तस्वीर जरूर पेश करते हैं.

भारत में कितने बकरों की कुर्बानी होती है?

भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ से अधिक मानी जाती है. विभिन्न रिपोर्ट्स और बाजार विश्लेषणों के मुताबिक, बकरीद के दौरान लगभग 8 से 10 फीसदी मुस्लिम परिवार कुर्बानी करते हैं. इन्हीं अनुमानों के आधार पर दावा किया जाता है कि हर साल बकरीद के दौरान देशभर में करीब 2 करोड़ बकरों की बिक्री और कुर्बानी हो सकती है. हालांकि इन आंकड़ों की किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. भारत का पशुपालन और मीट उद्योग लगातार तेजी से बढ़ रहा है. Basic Animal Husbandry Statistics 2025 रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में भारत का कुल मीट प्रोडक्शन 10.50 मिलियन टन रहा. 2023-24 की तुलना में इसमें 2.46 फीसदी की वृद्धि हुई. वहीं 2018-19 में यह आंकड़ा 8.11 मिलियन टन था. प्रति व्यक्ति मीट उपलब्धता 6.15 किलो प्रति वर्ष से बढ़कर 7.50 किलो प्रति वर्ष हो गई. दुनिया में मीट उत्पादन के मामले में भारत चौथे स्थान पर माना जाता है.

किस जानवर का कितना हिस्सा?

रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल मीट उत्पादन में चिकन की हिस्सेदारी लगभग 49%, भैंस का हिस्सा करीब 19%, बकरे के मीट की हिस्सेदारी लगभग 15% मानी जाती है. यह आंकड़े बताते हैं कि बकरे का मांस भारतीय मीट बाजार का एक बड़ा हिस्सा है और इसकी मांग लगातार बनी हुई है. मीट उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर, उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर और महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी भारत और उत्तर भारत में बकरीद के दौरान पशु बाजारों की आर्थिक गतिविधियां काफी तेजी से बढ़ती हैं.

आधिकारिक आंकड़े नहीं लेकिन ट्रेंड साफ

भारत में हर साल कितने बकरे काटे जाते हैं, इसका कोई आधिकारिक राष्ट्रीय डेटा उपलब्ध नहीं है. न ही सरकार बकरीद के दौरान होने वाली कुल कुर्बानियों का अलग रिकॉर्ड जारी करती है. फिर भी अलग-अलग शहरों के पशु बाजारों, बूचड़खानों और मीट इंडस्ट्री के आंकड़ों से इतना जरूर साफ होता है कि बकरीद केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के बड़े आर्थिक कारोबार से भी जुड़ा हुआ है. देश में बढ़ता मीट उत्पादन और पशु व्यापार इस बात का संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में यह बाजार और भी बड़ा हो सकता है.

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