Indian diplomacy : साल 2025 अब अपने अंतिम दौर में है और भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां बीत रहे वर्ष की चुनौतियां आने वाले 2026 की दिशा तय करेंगी. वर्ष 2025 भारत के लिए राजनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक लिहाज से काफी कठिन रहा. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी, पड़ोसी देशों में अस्थिरता, आतंकवाद और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को लगातार परखा. ऐसे में 2026 भारत के लिए सिर्फ एक नया कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है.
भारत-अमेरिका रिश्ते में आएगी नरमी या होगी टकराहट
2026 में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा काफी हद तक ट्रेड डील और ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगी. ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से संरक्षणवादी नीतियों और सख्त टैरिफ रुख ने भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच बैक-चैनल कूटनीति सक्रिय है. पाकिस्तान के साथ शांति कायम करने को लेकर ट्रंप की महत्वाकांक्षाएं भी इस रिश्ते का अहम हिस्सा हैं. भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो द्विपक्षीय रिश्तों को संतुलन में रखने की कोशिश करेंगे.
यूरोप पर भारत का रणनीतिक फोकस
भारत 2026 में यूरोप के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है. पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इसके अलावा जनवरी की शुरुआत में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के भारत दौरे और फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की संभावित यात्रा से भारत-यूरोप संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है. भारत पहले ही ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर चुका है और अब यूरोपीय संघ के साथ व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है, जिससे भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार खुलने की संभावना है.
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बेचैन पाकिस्तान पर सख्त निगरानी
2025 में पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे. 2026 में भी यह तनाव भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना रहेगा. सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि पाकिस्तान से जुड़े किसी भी आतंकी हमले के सबूत सामने आते हैं, तो भारत को सैन्य, राजनीतिक और राजनयिक तीनों मोर्चों पर त्वरित और सख्त प्रतिक्रिया देनी होगी. यह पूरे साल भारत की रणनीतिक क्षमता की परीक्षा होगी.
चुनावों की कसौटी पर नेपाल और बांग्लादेश
भारत के दो अहम पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश 2026 में बड़े चुनावी दौर से गुजरने वाले हैं. नेपाल में सवाल यह है कि क्या पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व युवा नेताओं के लिए रास्ता छोड़ेगा या फिर राजशाही समर्थक समूह अपनी पकड़ मजबूत करेंगे. वहीं बांग्लादेश में सुरक्षा चिंताओं और अवामी लीग द्वारा चुनावों के संभावित बहिष्कार की आशंका चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है. इन दोनों देशों की राजनीतिक स्थिरता भारत के हितों से सीधे जुड़ी हुई है.
BRICS और क्वाड में भारत की रणनीतिक अग्निपरीक्षा
2026 में भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की भी मेज़बानी करना चाहता है, खासकर अगर राष्ट्रपति ट्रंप भारत यात्रा पर आते हैं. दोनों मंचों पर भारत की भूमिका उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को परखेगी.
तकनीकी ताकत का प्रदर्शन
फरवरी 2026 में भारत The AI Impact Summit की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहा है. यह इसका दूसरा संस्करण होगा, पहला इस साल पेरिस में आयोजित किया गया था. इस समिट में वैश्विक नेता और टेक्नोलॉजी दिग्गज शामिल होंगे. भारत के लिए यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-टेक क्षेत्रों में अपनी बढ़ती ताकत दिखाने का बड़ा मंच होगा.
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अमेरिकी अध्यक्षता में G20 और भारत की नजर
2026 में G20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी अमेरिका करेगा. ट्रंप प्रशासन इस मंच का कैसे उपयोग करता है, यह उसकी वैश्विक प्राथमिकताओं और प्रभाव को दर्शाएगा. भारत इस समिट पर बारीकी से नजर रखेगा, खासकर तब जब अमेरिका ने पिछले दक्षिण अफ्रीका समिट में सीमित भागीदारी दिखाई थी.
चीन-अमेरिका टकराव और भारत की भूमिका
AI और सेमीकंडक्टर तकनीक को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है. ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच यह संघर्ष वैश्विक सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी के भविष्य को तय करेगा. भारत इस दौड़ में एक उभरते खिलाड़ी के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश में है.
भारती की बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारी
अफ्रीकी संघ को G20 में शामिल कराने के बाद भारत-अफ्रीका संबंध नई मजबूती की ओर बढ़े हैं. भारत अब अगले भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की मेज़बानी पर विचार कर रहा है. वहीं यूक्रेन-रूस युद्ध के संदर्भ में, अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत की भूमिका और अहम हो गई है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की संभावित भारत यात्रा पर भी विचार चल रहा है, जो शांति प्रक्रिया की दिशा तय कर सकती है. कुल मिलाकर, 2026 भारत के लिए कूटनीति, सुरक्षा, व्यापार और तकनीक चारों मोर्चों पर निर्णायक साबित होने वाला है. 2025 की चुनौतियों से सबक लेकर भारत अब एक ऐसे साल में प्रवेश कर रहा है, जहां हर कदम उसकी वैश्विक हैसियत को परिभाषित करेगा.