Shaksgam Valley : शक्सगाम घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है. इस रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र में चीन की ओर से बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू किए जाने के बाद भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है. भारत का साफ कहना है कि शक्सगाम घाटी उसका संप्रभु क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह की गतिविधि उसकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है.
शक्सगाम घाटी को लेकर क्यों बढ़ा विवाद
शक्सगाम घाटी को ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट के नाम से भी जाना जाता है. यह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में स्थित है और सियाचिन ग्लेशियर के ठीक उत्तर में पड़ती है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील बनाती है. उत्तर में यह चीन के शिनजियांग प्रांत से लगती है, जबकि दक्षिण और पश्चिम में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के हुंजा-गिलगिट क्षेत्र से इसकी सीमा मिलती है. पूर्व में यह सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र से जुड़ी हुई है. भारत का कहना है कि अगर इस इलाके में पक्की सड़कें और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तैयार हो जाते हैं तो उसे उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान ,दोनों मोर्चों पर गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
शक्सगाम घाटी का क्या है इतिहास
आजादी से पहले शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा थी. 1948 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसमें शक्सगाम घाटी भी शामिल थी. इसके बाद 1963 में पाकिस्तान ने चीन के साथ एक सीमा समझौता किया और इस क्षेत्र को चीन के हवाले कर दिया. हालांकि भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी और इसे पूरी तरह अवैध बताया है. भारत का रुख साफ है कि पाकिस्तान को किसी ऐसे इलाके को किसी तीसरे देश को सौंपने का अधिकार नहीं था, जो खुद उसका नहीं था.
चीन के दावे पर भारत की आपत्ति
चीन का कहना है कि 1963 के समझौते के तहत शक्सगाम घाटी उसका हिस्सा है और वहां किए जा रहे सभी निर्माण कार्य पूरी तरह वैध हैं. चीन इस इलाके में सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है. खबरों के मुताबिक, शक्सगाम घाटी में करीब 75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है. वहीं भारत ने चीन की इन गतिविधियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और शक्सगाम घाटी भी उसी का हिस्सा है. भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी मान्यता देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसका एक हिस्सा भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है.
सुरक्षा लिहाज से क्यों अहम है शक्सगाम
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक शक्सगाम घाटी में चीन का इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क मजबूत होने से उसे सियाचिन और लद्दाख क्षेत्र के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने में आसानी होगी. इससे भारत की सुरक्षा चुनौतियां कई गुना बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि भारत इस इलाके में किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है. शक्सगाम घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच पहले से चले आ रहे सीमा विवाद में यह नया अध्याय जुड़ गया है. एक तरफ चीन अपनी परियोजनाओं को जायज ठहरा रहा है, तो दूसरी ओर भारत अपने क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने की बात कह रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर और ज्यादा गर्माने के आसार हैं.