लालू-नीतीश के चहेते को मोदी शाह की जिम्मेदारी..! मुख्यमंत्री की गद्दी तक कैसे पहुंचे सम्राट चौधरी ?

Samrat Choudhary : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुन लिया है, जिसके बाद उनका राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनना तय है. इस फैसले के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हो गया है. अब जब यह तय हो चुका है कि सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री होंगे तो राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा हो रही है कि कभी राजद से राजनीतिक शुरुआत कर लालू के सिपाही रहे सम्राट चौधरी RSS से नहीं होने के बाद भी मोदी शाह के पंसदीदा कैसे बन गए.

दिलचस्प रहा राजनीतिक सफर

16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी, वरिष्ठ नेता शकुनी चौधरी और पार्वती देवी के पुत्र हैं. वे वर्तमान में मुंगेर जिले की तारापुर सीट से विधायक हैं और पहले विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी रह चुके हैं. उन्हें प्रशासनिक और विधायी कामकाज का व्यापक अनुभव हासिल है. राजनीति में उनकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई. शुरुआती दौर में वे लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक धारा के करीब रहे, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. आज वे नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं.

बीजेपी में तेज़ी से उभार

सम्राट चौधरी ने 2017 में भाजपा का दामन थामा. उसी वर्ष नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हुए थे, जिसके बाद सम्राट को पंचायती राज मंत्री बनाया गया. सिर्फ आठ से नौं वर्षों के भीतर उन्होंने पार्टी में उल्लेखनीय स्थान हासिल किया. अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़ा तब भाजपा ने सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. इस भूमिका में उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. सम्राट चौधरी दो बार बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं. वर्ष 2024 में उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई और नवंबर 2025 में गृह मंत्रालय भी सौंपा गया. इन भूमिकाओं में उनके कामकाज ने पार्टी नेतृत्व का विश्वास और मजबूत किया.

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अलग पहचान और राजनीतिक संदेश

सम्राट चौधरी उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आए जब उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने तक पगड़ी (मुरेठा) नहीं उतारने की प्रतिज्ञा ली थी. वे हर सार्वजनिक कार्यक्रम में पगड़ी पहने नजर आते थे. हालांकि बाद में जब नीतीश कुमार दोबारा एनडीए में लौटे और सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बने, तो उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के बाद अपनी पगड़ी उतारी.

सामाजिक समीकरण में मजबूत पकड़

ओबीसी वर्ग से आने वाले सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से ताल्लुक रखते हैं, जिसकी बिहार में अच्छी आबादी है. इस लिहाज से वे एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं. भाजपा द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जाना न केवल उनके राजनीतिक करियर का बड़ा पड़ाव है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत भी माना जा रहा है. अब नजर इस बात पर होगी कि वे अपने अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक कौशल के दम पर राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं.

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