200 मंदिर, एक रहस्य – जहाँ हर पत्थर बोलता है 1400 साल पुराना इतिहास!

मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना में एक ऐसा मंदिर परिसर है, जहां 200 से अधिक मंदिरों की शृंखला है. इतिहासकारों की मानें तो ये मंदिर 6वीं से लेकर 9वीं सदी के मध्य के हैं. हालांकि, वर्तमान में यह मंदिर खंडहर और अवशेष का रूप ले चुके हैं. मंदिर किस तरह अवशेष बने इसका कोई प्रमाण तो नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि भूकंप के चलते ये मंदिर खंडहर बन गए. यहां आने के बाद सैलानी भी मंदिरों को देखकर अपने प्राचीन गौरवशाली इतिहास में खो जाते हैं.

मुरैना से लगभग 35 किलोमीटर दूर पड़ावली गांव के पास एक पहाड़ी है, जिसमें लगभग 25 एकड़ के क्षेत्र में 200 मंदिरों की शृंखला है. यह बटेश्वर मंदिर परिसर के रूप में जाना जाता है. यहां मंदिर भगवान शिव और विष्णु के बताए जाते हैं. 2005 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक परियोजना शुरू की गई थी, जिससे इनके स्वरूपों में काफी सुधार किया गया.

गुर्जर प्रतिहार वंश द्वारा किया गया था निर्माण

इतिहासकारों की मानें तो इन मंदिरों का निर्माण 6वीं से 9वीं शताब्दी के मध्य किया गया था. उस समय इस क्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार वंश के शासन के आलेख मिलते हैं. ऐसा माना जाता है कि प्रतिहार स्वयं को सूर्यवंशी मानते थे और अपने आपको लक्ष्मण का वंशज बताते थे. अगर बटेश्वर की संरचना और रूपरेखा को देखा जाए तो यहां कुल मिलाकर छोटे एवं बड़े सभी प्रकार के 200 से अधिक मंदिर हैं, जिनमें कई खंडहर भी हो चुके हैं.

इस तरह पहुंचें बटेश्वर मंदिर

बटेश्वर मंदिर परिसर मुरैना के पड़ावली गांव के पास स्थित है. यह स्थान मुरैना जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी और मुरैना रेलवे स्टेशन से 37 किमी दूर है. अगर आपको इसे देखने की लालसा है तो मुरैना से निजी वाहन किराए पर लेना होगा और बटेश्वर मंदिर परिसर, पड़ावली और मितावली एक साथ जाना सबसे अच्छा है. यदि समय मिले तो आप काकनमठ और मितौली में चौसठ योगिनी मंदिर भी जा सकते हैं

इन्होंने की थी इन मंदिरों की खोज

अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा इन मंदिरों का दौरा किया गया और इसके खंडहरों को पड़ावली के दक्षिण पूर्व में छोटे और बड़े 200 से अधिक मंदिरों का संग्रह के रूप में बताया गया था. इसके बाद 2005 में पुरातत्वविद केके मोहम्मद ने इन मंदिरों का जीर्णोद्धार के लिए अभियान जारी रखा. केके मोहम्मद के मुताबिक, यह मेरा तीर्थ स्थान है. मैं यहां हर तीन महीने में एक बार आता हूं. मैं इस मंदिर परिसर के बारे में भावुक हूं. साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अथक प्रयासों से यहां हाल ही में कुछ मंदिरों का पुनर्निर्माण कर उन्हें वास्तविक स्वरूप प्रदान किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *