खबर बिहार से है जहां एक और पुल ध्वस्त (Bridge Collapse) हो गया। ध्वस्त हुआ नया पुल बिहार के सिवान जिले महाराजगंज प्रखंड के पटेढ़ा गांव में नहर के बीचोबीच बना हुआ था। पुल के टूट जाने की वजह से आस पास के दर्जनों गांव का संपर्क टूट गया। इस घटना से महज 3 दिन पहले ही प्रदेश के और जिला अररिया में नवनिर्मित बकरा पुल ध्वस्त हो गया था। लेकिन प्रदेश में यह पहला, दूसरा या तीसरा मामला नहीं है जब राज्य में कोई निर्माणाधीन पुल टूट गया हो। इससे पहले भी पुल ध्वस्त होने की खबरों ने सुर्खियां बटोरी। जांच के लिए कई समितियों का गठन किया गया और उनके आधार रिपोर्ट्स के आधार पर सरकार पर हमले हुए, सवाल उठाए गए, इंजीनियरों पर गाज गिरा, पुल बनाने वालों ठेकेदारों को ब्लैकलिस्टेड किया गया लेकिन इसका नतीजा एक ही रहा कि एक और पुल ध्वस्त हो गया।
बिहार के विकास में Bridge की भूमिका
एक कदम पीछे हटते हुए थोड़ा मुद्दे से भटकते हैं। जब बिहार मानसून का इंतजार कर रहा है, ठीक उसी वक्त प्रदेश का एक हिस्सा भीषण हिटवेव और सूखे से जूझ रहा और दूसरा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है। राज्य में करीब 1 दर्जन से अधिक बड़ी नदियां है जिसपर करीब 100 से अधिक छोटी बड़ी पुल है। इसमें कुछ निर्माणाधीन है जबकि कुछ ऐसे है जो राज्य के एक मुख्यालय से दूसरे को जोड़ने के लिए मेरुदंड की तरह है। अब उदाहरण के लिए देखें तो राज्य ही नहीं बल्कि देश के सबसे बड़े नदी पुलों में से एक गांधी सेतू बिहार के उत्तर और दक्षिण को जोड़ी है। दरअसल गंगा नदी राज्य को उत्तर और दक्षिण बिहार में बाटती है। यह बंटवारा इस पिछड़े राज्य के विकास मे सबसे बड़े बाधकों में एक माना जाता है। हालांकि इसके अपने मायने है जिसे सरकार और जनता अपने हिस्से के सच को सही मानकर चलती है। लेकिन विकास के पैमानों में यह साफ साफ दिखता है कि नदी के उत्तरी किनारे से लगा बिहार अपेक्षाकृत ज्यादा पिछड़ा है। इस हिस्से के पिछड़ जाने के कई वजह है लेकिन सबसे बड़ा है कनेक्टिविटी। इस भाग के लोगों के लिए अपने ही प्रदेश के दूसरे हिस्से में पहुंचना आसान नहीं होता। नतिजन यहाँ विकास थोड़ी नहीं बहुत देर से पहुंचती है,आप यह भी मान सकते है कि पहुँचती ही नहीं है। इसलिए प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि प्रदेश का एक हिस्सा दूसरे से कनेक्ट हो। इस कनेक्टिविटी को स्थापित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा राज्य के नदियों पर पुल निर्माण का कार्य किया जा रहा हैं।
आखिर बिहार में पुल क्यों गिरते है ?
पिछले 2 सालों के आँकड़े की बात करें तो राज्य में करीब दर्जन भर से अधिक Bridge Collapse हो चुके है। इसमें कुछ पुल ऐसे थे जिसका अभी उद्घाटन भी नहीं हुआ था। तो भागलपुर में गंगा नदी पर 17 सौ करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल उद्घाटन से पहले ही दो बार टूट गया। बाकी दूसरे ध्वस्त हुए पुलों की संख्या तो दर्जनों में है ही। खबरों के आर्काइव में आप अगर पुलों को ढूँढेंगे तो आपको पता चलेगा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा और आर्थिक आजादी के बाद भी राज्य में बन रहे और बन चुके पुलों की मजबूती इतनी नहीं होती जिसपर खड़ी हो सरकार अपने लिए एक वोट का इंतजाम कर सके। बिहार में पुल गिरने की घटना राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है तो सरकारी सिस्टम पर भी सवाल उठता है। एक बाद एक पुल गिरने के बाद भी ना तो सिस्टम के पास जवाब है और ना ही सरकार के पास कोई बहाना। सरकार और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा इस व्याप्त भ्रस्टाचार में अपनी भूमिका से भले ही आम लोगों को गुमराह करने की कोशिश करें। लेकिन बदलते पालों के बीच गुनहगार हर कोई है।
एक ही Bridge कई बार बनता है…
अब भागलपुर में गंगा नदी पर 17 सौ करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल को ही लीजिए, पहली बार जब यह पुल ध्वस्त हुआ राज्य में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार के खिलाफ इसको लेकर जांच की बात कही, लेकिन जब दूसरी बार ऐसा हुआ तो राजद नेता खुद पथ एवं परिवहन मंत्रालय के मंत्री थे…। प्रदेश में पुल गिरने की असाधारण समस्या अब सामान्य घटना हो गई है। पुल का टेंडर जारी होता है, पुल बनती है और उद्घाटन से पहले ही गिर जाती है। उद्घाटन का दर्द अगर किसी तरफ सह भी लिया तो नए पुल की खुशी इतना उत्साहित कर देता हैं कि जल्द ही पुल खुद को ध्वस्त कर लेती है। अब गिरते पुलों ना तो कोई कार्रवाई होती है, मगर बदले में नए पल का टेंडर मिलता जरूर हैं। अगर दबाब में अगर कार्रवाई हुई भी तो रिपोर्ट्स के पन्नों को रंगीन कागजों से बदल दिया जाता है। फिर बहाने तो ऐसे है कि सुनने वाला हैरान रह जाए। 29 अप्रैल 2022 को बिहार के सुल्तानगंज में गंगा नदी पर बन रहे पुल कए ध्वस्त होने को लेकर विभाग के अधिकारी ने कहा कि तेज हवा और धुंध के कारण पुल गिर गया।
बिहार में कब कब Bridge गिरा
पिछले दो सालों में राज्य में ढहने वालों पुलों की संख्या करीब 1 दर्जन है। जो बिहार में बुनियादी ढाँचे के विकास और रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों और जोखिमों को उजागर करती हैं। और बताती है राज्य में भ्रस्टाचार की निश्चित सीमा या फिर क्षेत्र नहीं है। प्रदेश में पुल ढहने की बड़ी घटनाएं है।
- सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा घाट Bridge
4 जून 2023 को भागलपुर के सुल्तानगंज और खगड़िया के अगुवानी गंगा घाट के बीच बन रहे पुल के पिलर 10, 11 और 12 अचानक गंगा नदी में गिर गए। 1710 करोड़ की लागत से बन रहे इस पुल पर चार लेन का पुल बनाया जा रहा था। घटना की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
- सारण जिले में पुल ढहना
19 मार्च 2023 को सारण जिले में ब्रिटिशकालीन सड़क पुल ढह गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए। 2022 की बाढ़ के बाद से ही पुल की हालत खराब होती जा रही थी और कई जगहों पर दरारें पड़ गई थीं। इसके बावजूद निर्माण विभाग ने इसे खतरनाक पुल घोषित नहीं किया। खास बात यह है कि पुल के दोनों तरफ चेतावनी संकेत भी नहीं लगाए गए थे।
- बिहटा-सरमेरा में फोर-लेन पुल हादसा
19 फरवरी, 2023 को पटना जिले के बिहटा में निर्माण के दौरान फोर-लेन पुल ढह गया। इस पुल का उद्देश्य पटना को नालंदा जिले से जोड़ना था। सौभाग्य से, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
- दरभंगा में लोहे का पुल ढह गया
16 जनवरी, 2023 को दरभंगा जिले में एक लोहे का पुल ओवरलोड ट्रक की टक्कर से ढह गया। यह पुल दरभंगा को मधुबनी, सहरसा और समस्तीपुर जिलों से जोड़ता था। बालू से लदा ट्रक पुल पर पहुंचा और वह टूटकर नदी में गिर गया।
- पूर्णिया-कटिहार में पुल ढहना
15 मई, 2023 को पूर्णिया जिले में एक बड़ी घटना हुई, जहां भूस्खलन के दौरान एक बॉक्स ब्रिज ढह गया। इससे पहले जुलाई 2022 में कटिहार जिले में एक और निर्माणाधीन पुल ढह गया था। इस पुल के ढहने से दस मजदूर घायल हो गए थे।
- नालंदा में निर्माणाधीन पुल का ढहना
इन घटनाओं से पहले 18 नवंबर 2022 को नालंदा जिले में निर्माणाधीन सड़क Bridge Collapse हो गया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वेना ब्लॉक में फोर-लेन सेक्शन का निर्माण चल रहा था। बताया गया कि पुल का निर्माण शुरू में घटिया सामग्री से किया जा रहा था, जिससे यह आपदा आई।
- सहरसा और बख्तियारपुर के बीच पुल ढहना
जून 2022 को सहरसा जिले में एक पुल का एक हिस्सा ढह गया, जिसमें तीन मजदूर घायल हो गए। यह घटना कोसी तटबंध के पास सिमरी बख्तियारपुर ब्लॉक के कंडूमर गांव में हुई। घायल मजदूरों को अन्य लोगों ने बचाया और सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत में सुधार हुआ।
- पटना के फतुहा में भारी बारिश में पुल ढहना
20 मई 2022 को भारी बारिश के कारण पटना जिले के फतुहा में 136 साल पुराना सड़क पुल ढह गया। 1884 में ब्रिटिश शासन के दौरान बने इस पुल का रखरखाव ठीक से नहीं किया गया था। पुल और सड़क निर्माण विभाग द्वारा खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद भारी वाहनों को गुजरने की अनुमति दी गई।
विनाश के इस सूची में अब दो पुलों का इजाफा हुआ है। इसमें अररिया और सिवान का नाम भी जुड़ गया।