Bhaidooj: दीपावली के दो दिन बाद मनाए जाने वाला भाई दूज पर भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु सुख समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती है। बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश में भाई दूज को गोधन या यम द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। यहां की परंपराएं देश के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग और अनोखी है, कहीं इसे बजरी कहा जाता है, तो कहीं टीका लेकिन भाव एक ही है भाई की लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना।
गोधन की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गोधन भगवान श्रीकृष्ण का एक मित्र था। कथा के अनुसार, एक बार गोधन ने गोपियों के संग रास करने की इच्छा जताई और श्रीकृष्ण का रूप धारण कर गोपियों को लुभाने की कोशिश की। लेकिन गोपियों को यह छल पसंद नहीं आया और इस कारण गोधन को अपने प्राणों का दान देना पड़ा। उसकी यह इच्छा अधूरी रह गई कि गोपियां हमेशा उसके आस-पास रहें। इसलिए भाई दूज के दिन बहनें गोधन की आकृति बनाकर उसे मूसल से कूटती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से गोधन की आत्मा को शांति मिलती है।
बजरी खिलाने की परंपरा
भाई दूज के दिन बिहार में बहनें अपने भाइयों को पारंपरिक तरीके से बजरी खिलाती हैं। बजरी को खिलाने के पीछे माना जाता है कि भाई खूब मजबूत बनता है। यह एक प्राचीन परंपरा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। बहनें अपने हाथों से विशेष भोजन तैयार करती हैं और भाई को प्रेम से खिलाती हैं।
भाइयों को श्राप देने की अनोखी परंपरा
उत्तर भारत विशेष कर बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश में भाई दूज पर सबसे अनोखी परंपरा है। भाईयों को मरने का श्राप देना। सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे भाई की दीर्घायु की कामना का भाव छुपा हुआ है।बहनें अपने भाइयों को पहले खूब कोसती हैं, फिर अपनी जीभ पर रेंगनी (एक प्रकार की स्थानीय वनस्पति) का कांटा चुभाती हैं, और अपनी गलती के लिए भगवान से माफी मांगती हैं।
श्राप देने के पीछे की कथा
एक कुम्हारिन थी जो अपने भाई से बहुत अधिक स्नेह करती थी। उसने कभी अपने भाई को गाली या श्राप नहीं दिया था। उसके भाई की शादी होने वाली थी। शादी की एक परंपरा का निर्वहन करने के लिए कुम्हारिन मिट्टी खोदने गई थी। इसी दौरान यमराज और यमी की बातचीत सुनकर उसे पता चला कि यम ऐसे व्यक्ति को मृत्यु देने वाले हैं जिसने आज तक कोई गाली या श्राप नहीं सुना हो।
यह सुनते ही कुम्हारिन दौड़ते हुए घर गई और उसने अपने भाई को मरने का श्राप देना शुरू कर दिया। इसके बाद यमराज ने कुम्हारिन की कई प्रकार से परीक्षा ली, लेकिन वह हर परीक्षा में सफल रही और उसके भाई का जीवन बच गया। माना जाता है कि तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई को यम के भय से मुक्त करने और उसकी लंबी आयु के लिए बहनें भाइयों को श्राप देती हैं।
यमराज की पूजा और पाप से मुक्ति
भाई दूज पर यमराज और यमुना माता की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन बहनें यमराज से अपने भाइयों के जीवन की रक्षा और उनके पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि भाई दूज पर यमराज से पापों की माफी मांगने से अज्ञात रूप से हुए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दौरान बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनकी दीर्घायु और समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन बहनें भाई की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और उनके शत्रुओं का नाश करने की कामना करती हैं।
बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भाई दूज की परंपराएं देश के अन्य हिस्सों से अलग और अनोखी हैं। बजरी खिलाना, श्राप देना, जीभ पर कांटा चुभाना, और गोधन कूटना – ये सभी रस्में भाई-बहन के अटूट प्रेम की गवाही देती हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा प्यार त्याग, समर्पण और सुरक्षा की भावना में निहित होता है।