Pitru Paksha : पितृपक्ष में पितरों को तर्पण से मिलती है शांति…जानिए क्या है ये परंपरा

Pitru Paksha: हिंदू धर्म में कई पर्व एवं त्योहार अलग-अलग रीति-रिवाज एवं परंपरा से बनाए जाते हैं इन त्योहारों को मनाने के पीछे कई धार्मिक पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं भी जुड़ी हुई है. इसके साथ ही हिंदू धर्म में बच्चों के जन्म से पहले यानी कि गर्भधारण से लेकर मरने के बाद तक की कई परंपराएं निभाई जाती हैं जिनमें से एक है पितृपक्ष.

क्या किया जाता है पितृपक्ष के दौरान…

पितृ पक्ष के 16 दोनों पितरों को संतुष्ट करने के लिए बहुत सारी चीजें की जाती है . पितृ पक्ष यानि कि श्राद्ध , हिन्दू कैलेंडर के भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विनी मास की अमावस्या तक मनाया जाता है. इस दौरान कई तरह की चीज वर्जित मानी जाती है.  इन दिनों पितरों को याद कर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है उनका आशीर्वाद मिलता है.

पितृ पक्ष में क्यों करना चाहिए सात्विक भोजन.…

पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करना सबसे महत्वपूर्ण माना
जाता है. कहा जाता है कि भोजन ही मन और विचार प्रभावित करते हैं. सात्विक आहार खाने में मन शांत रहता है और पूजा पाठ में मन लगता है वही तामसिक भोजन करने से मानसिक शांति भंग हो सकती है.

किन चीजों का करना चाहिए परहेज

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में कुछ खास खाद्य पदार्थ सब्जियां नहीं खाने चाहिए इनमें सफेद चना ,काला चना, मसूर की दाल, उड़द की दाल, काली सरसों के दाने ,जीरा और काला नमक शामिल है . इसके अलावा चने की सत्तू गेहूं चावल इन दिनों सेवन करने की मनाही होती है माना जाता है कि इन चीजों को खाने से पितर नाराज हो जाते हैं. सब्जियों में भी कुछ ऐसी चीज हैं जिन्हें पितृ पक्ष में वर्जित माना जाता है इसमें बैगन करेला खीर लहसुन और प्याज शामिल है.
सब्जियों और दालों के अलावा कुछ और खाने-पीने की चीज भी दौरान नहीं खानी चाहिए जैसे पान और बासी भोजन माना जाता है की बासी भोजन पितरों के लिए अशुद्ध है इससे श्राद्ध कर्म का महत्व नहीं मिलता.

नियम का रखे ध्यान….

यदि आपसे पूर्व में पितरों को लेकर कोई भूल वश गलती हो गई हो तो उसके लिए उनकी पावन तिथि पर तर्पण और श्राद्ध आदि करके क्षमा मांगे और कल्याण की कामना करें.
पितृ पक्ष के दौरान इंसान को कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे पितरों की भावना को ठेस पहुंचे.
किसी भी जरूरतमंद या ब्राह्मण व्यक्ति को दान देते समय अपने मन में भूल कर भी अहंकार ना लाएं.
मजबूरी या नाराज होकर दान ना करें.
पितृपक्ष के दौरान सगाई विवाह गृह प्रवेश जन्म उत्सव आदि जैसी चीजों को नहीं करना चाहिए.
पितृपक्ष में प्रतिदिन पीपल के पेड़ में जल दें और शाम के समय सरसों के तेल का दिया जलाएं.
पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को सभी प्रकार पर सुख सौभाग्य प्राप्त होता है.

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