OPINION : चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। फिर चुनाव के दौरान ही अंतरिम जमानत पर बाहर भी आते हैं। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताते हैं कि चुनाव परिणाम में अगर एनडीए जीत जाती हैं तो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ नहीं रहेंगे तो बीजेपी ने इस पर यह कहते हुए पल्ला झार लिया कि केजरीवाल जेल में रह कर बौखला गए है इसलिए वो कुछ भी बोल रहें हैं। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पत्रकारों को दिए जाने वाले इंटरव्यू की संख्या में कमी आना? मीडिया से दूरी? और केजरीवाल का बयान क्या यह महज इतेफाक है? अगर नहीं तो इसके मायने क्या हैं ?
लोकसभा के पांचवे चरण का मतदान जारी हैं, और अगले 2 चरण के लिए चुनाव प्रचार जोड़ों पर हैं। लगातार 3 बार सत्ता पर काबिज होने के लिए अबकी बार 400 पार के नारे लेकर चल रही बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 80 सीटें जितना बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर बीजेपी की गाड़ी यहाँ पलट जाती है तो फिर 400 पार तो बाद में पहले बहुमत पार करना भी कठिन हो जाएगा। पिछले आँकड़े भी यही कहते हैं। लेकिन बीजेपी के प्रदेश में 80 पार और देश में 400 के लिए जरूरी हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की भूमिका। जो पार्टी के साथ साथ हिन्दुत्व के नए ब्रांड एंबेसडर है। पार्टी ने चुनाव के लिए इन्हें स्टार प्रचारक बना रखा है। लेकिन कुछ चीजें हैं जो मीडिया के साथ साथ पार्टी को भी खटक रही होगी?
एनडीए सरकार के 10 सालों में प्रधानमंत्री पर आरोप लगते रहे हैं कि एक समय मीडिया के चहेते रहें नरेंद्र मोदी ने मीडिया से दूरी बना ली है। लेकिन इस चुनाव में अब इसका विपरीत देखने को मिल रहा। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम ने करीब 40 से अधिक पत्रकारों के साथ साक्षात्कार या फ़िर 1-2-1 किया। लेकिन शायद मीडिया से दूर रहने का जिम्मा उन्होंने इस बार उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री को दे रखा है। ऐसा हम नहीं बल्कि मीडिया के दिग्गजों का मानना हैं। जानकर कहते है 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में अचानक से मीडिया में आए योगी आदित्य नाथ आज कल पत्रकारों के साथ इंटरव्यू से बच रहें हैं? जमीनी हकीकत भी ऐसा ही कुछ है।
खबर है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जब मुख्यमंत्री की टीम मीडिया प्लान लेकर जाती है और बताती है कि आज कल चैनल के एडिटर आपसे मिलना चाहते हैं इंटरव्यू करना चाहते हैं लेकिन सीएम योगी बड़े-बड़े नाम देखकर भी उनसे मिल नहीं रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि किसी से मिल रहे और किसी से नहीं मिल रहे बल्कि हालात सबके यही है। जितना बड़ा नाम मुलाकात का इंतजार भी उतना ही बड़ा। इन्टरव्यू की बात छोड़ भी दे और 1-2-1 में भी किसी रिपोर्टर का नंबर नहीं लग रहा। सूखे के बीच स्थानीय होने का फायदा आजतक के रिपोर्टर को जरूर मिला है लेकिन संबंध का असर ज्यादा काम आया। बाकियों के तो क्या ही कहने उनके हालात तो यह है कि पीएम का साक्षात्कार चुटकियों लेने वालों के लिए सीएम के साथ एक 1-2-1 भी नहीं मिल रहा।
मीडिया से रूबरू नहीं होने के सवाल पर योगी कहते हैं जो सवाल पूछा जाएगा उसके जबाव तो चुनावी सभाओं में वो दे ही देते है फिर साक्षात्कार या 1-2-1 की क्या ही जरूरत? लेकिन इसकी आवश्यकता से वो भी भलीभांति परिचित हैं। कहा भी गया है हाथी के खाने और दिखाने के दांत अलग अलग होते हैं और राजनीति दिखने और दिखाने में एक सी हो जाय फिर किस बात की राजनीति?खैर प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल की कही बात और मीडिया से साक्षात्कार के मद्देनजर दूरी के वास्तविक मायने तो मुख्यमंत्री योगी ही बता सकते हैं लेकिन कैमरे जो दिखाने की कोशिश कर रहा है उसके कुछ तो संकेत है..जिसके मायनों को समझने के बीच लोकसभा चुनाव बीत रहा है।