प्रेमानंद महाराज की सीख: सफलता का असली रहस्य
आज के समय में हर कोई सफलता और आरामदायक जीवन की चाह रखता है।लोग चाहते हैं कि उनके पास पैसा, गाड़ी, बंगला और आरामदायक लाइफस्टाइल हो।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सच्ची सफलता किसे मिलती है और इसके लिए क्या करना पड़ता है?वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद महाराज ने भक्तों से बातचीत के दौरान इस सवाल का सरल और गहन उत्तर दिया।
सफलता किसे मिलती है?
श्री राधा हित केलि कुंज आश्रम, वृंदावन में प्रतिदिन संत प्रेमानंद महाराज भक्तों से संवाद करते हैं।
एक भक्त ने उनसे पूछा:
“महाराज जी, जीवन में सफलता किसको मिलती है? सफल होने के लिए हमें क्या करना चाहिए?” संत ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि, सफलता उन्हीं को मिलती है जो कष्ट सहते हैं और अपने आप को तराशते हैं।
मिट्टी के पात्र से सीख
महाराज जी ने उदाहरण देते हुए कहा:
“सोचिए, एक सुंदर पात्र बनाने के लिए मिट्टी को कितनी मेहनत और तकलीफों से गुजरना पड़ता है। पहले मिट्टी को खोदा जाता है, जिससे वह अपने आसपास से अलग होती है।
फिर उसे कुटा और दबाया जाता है, ताकि कोई ढेला न रहे। अंत में मिट्टी को अच्छी तरह से गूंथा जाता है और तभी वह पात्र बनने के योग्य बनती है।”इसी तरह, जीवन में भी आपको हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना सीखना होगा।
सफलता का मूल मंत्र
“सफलता उन्हीं को मिलती है जो कष्ट सहने की क्षमता रखते हैं।
अच्छे और बुरे दोनों कर्मों में अनुभव मिलेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि, अच्छा आचरण अपनाओ तो आप चमकेंगे और बुरे कर्मों में फंसोगे तो मिट जाओगे।”इसलिए, जीवन में भगवत प्राप्ति और वास्तविक सफलता पाने के लिए हमें अपने कर्मों और आचरण को सुधारते हुए, धैर्य और समर्पण के साथ मेहनत करनी चाहिए।