मनोरंजन। फरवरी 2017 में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री के साथ चलती कार में यौन शोषण की घटना समाने आती है। मामले की संगिनता को देखते हुए सरकार ने 2019 में रिटायर्ड न्यायमूर्ति हेमा की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय समिति का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए। कर्नाटका के प्रसिद्ध न्यायाधीश हेमा नायर की अध्यक्षता में गठित हेमा कमेटी ने अपने विस्तृत अध्ययन के बाद justice hema committee रिपोर्ट को तैयार किया है। रिपोर्ट में फिल्म उद्योग के भीतर कार्यकर्ता और कलाकारों की सुरक्षा, वेतन, और अनियमितताओं के मामलों की गंभीर समीक्षा की गई है। इस कमेटी ने जांच कर अपना रिपोर्ट्स सौंपा। वो रिपोर्ट्स पाँच साल बाद सार्वजनिक किया गया हैं। जिसके बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में विवाद खड़ा हो गया हैं और कथित अनियमितताओं के मद्देनजर हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस रिपोर्ट ने इंडस्ट्री में व्यापक पैमाने पर व्याप्त समस्याओं को उजागर किया है, जिससे मलयालम सिनेमा के अंधेरे पहलुओं की पोल खुल गई है।
justice hema committee रिपोर्ट के बाद क्या है इंडस्ट्री की स्थिति
रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद से इंडस्ट्री के भीतर कई अभिनेताओं, निर्माताओं और अन्य सदस्यों ने अपनी चिंताओं और सुझावों को सामने रखा है। रिपोर्ट के आधार पर, यह उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार और फिल्म उद्योग के संगठन जल्द ही आवश्यक सुधारों की दिशा में कदम उठाएंगे।रिपोर्ट ने साफ तौर पर यह दर्शाया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सुधार की आवश्यकता है और इसे पारदर्शिता, समानता और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। यह रिपोर्ट इंडस्ट्री के भीतर एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे सकती है, जहां महिला कलाकारों और तकनीशियनों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
justice hema committee द्वारा किये गए सार्वजनिक रिपोर्ट्स को सवालों में समझिए
- हेमा कमेटी क्या है?
फरवरी 2017 में एक अभिनेत्री के साथ चलती कार में यौन शोषण की घटना के बाद, सरकार ने इस मामले की जांच के लिए हेमा कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का नेतृत्व कर्नाटका के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस हेमा ने किया। दिसंबर 2019 में रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई थी, लेकिन इसे अब सार्वजनिक किया गया है, जिसके बाद इंडस्ट्री में हड़कंप मचा है।
- रिपोर्ट में किन बातों का खुलासा किया गया है ?
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण एक बड़ी समस्या है। कई महिला कलाकारों को काम के लिए सेक्सुअल फेवर की मांग की जाती है, और इंकार करने पर उन्हें काम से निकाले जाने या बैन का डर रहता है। डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स, और प्रोडक्शन कंट्रोलर्स इस अपराध में शामिल पाए गए हैं।
इंडस्ट्री में न्यूकमर्स को सफल होने के लिए सेक्सुअल फेवर के साथ एडजस्टमेंट करना पड़ता है। यह शब्द इंडस्ट्री में आम हो गए हैं, और कई बार विरोध करने पर धमकियां मिलती हैं और इंडस्ट्री से बाहर किया जाता है।
मेल एक्टर्स द्वारा महिलाओं को ऑफ सेट सेक्सुअल फेवर के लिए दबाव डालने के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाएं फिल्म में इंटीमेट सीन करने के बावजूद ऑफ सेट ऐसी मांगों का सामना करती हैं।
आउटडोर शूटिंग के दौरान महिला कलाकारों को टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। प्रोडक्शन यूनिट्स आमतौर पर इन सुविधाओं की व्यवस्था नहीं करतीं।
महिला कलाकार के साथ अक्सर लिखित कॉन्ट्रैक्ट नहीं किए जाते, जिससे क्रू मेंबर्स को तयशुदा फीस नहीं मिलती। महिला कलाकारों को बिना लिखित कॉन्ट्रैक्ट के काम करना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो जाती है।
- किन लोगों पर लगा है आरोप ?
अभिनेत्री मीनू मुनीर ने कई प्रमुख अभिनेताओं के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई है। इसमें मुकेश, जयसूर्या, और एदवेला बाबू के नाम शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत आरोप लगाए हैं।
अभिनेता जयसूर्या ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा कि ये आरोप उनके परिवार के लिए तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की योजना बनाई है और फेसबुक पर इन आरोपों को झूठा बताया है।
अभिनेत्री चार्मिला ने वरिष्ठ निर्देशक मोहम्मद पर सेक्सुअल फेवर के लिए प्रपोजल देने का आरोप लगाया है। इसके बाद उसे फिल्म से हटा दिया गया।
निर्देशक-अभिनेता रंजीत पर एक नवोदित अभिनेता ने अप्राकृतिक कृत्य का आरोप लगाया है। वहीं, बाबू पर सेक्सुअल फेवर की मांग करने का आरोप लगा है।
वयोवृद्ध अभिनेता सिद्धीक पर एक अभिनेत्री ने यौन शोषण और रेप का आरोप लगाया है। सिद्धीक ने AMMA के महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया है।
फिल्म इंडस्ट्री में सुधार की आवश्यकता : मोहनलाल
justice hema committee रिपोर्ट के बाद सुपरस्टार मोहनलाल ने AMMA के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और फिल्म इंडस्ट्री में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि फिल्म उद्योग में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में एक गंभीर स्थिति का खुलासा किया है, और यह मुद्दा इंडस्ट्री के भीतर सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।