Monsoon की बेरुखी से बिहार में सूखे का खतरा, डीजल सब्सिडी योजना को तत्काल लागू करने का निर्देश

पटना । एक तरफ जहां भारत के कई राज्यों में भारी बारिश से बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित है वहीं बिहार के कई जिलों में सूखे की चेतावनी सामने आने लगी है। राज्य में बारिश की कमी के कारण किसान परेशान हैं। अभी तक राज्य में Monsoon बेमौसम रहा है, लोगों को सावन के महीने में भारी बारिश की उम्मीद थी, लेकिन पहले दो सप्ताह तो बारिश के बिना ही बीत गए। बारिश की कमी के कारण खेतों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे धान की रोपाई में बाधा आ रही है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 55 से 60 प्रतिशत चावल की रोपाई पूरी हो पाई है। ज्ञात हो की बिहार में अधिकांश किसान मुख्य रूप से चावल उगाते हैं।

चावल के उत्पादन में आ सकती है 20 प्रतिशत कमी

Monsoon बारिश नहीं होने के कारण उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार में स्थिति खराब बताई जा रही है। राज्य ने इस साल 36.56 लाख हेक्टेयर भूमि पर चावल की खेती का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अभी तक केवल 55 से 60 प्रतिशत रोपाई पूरी हो पाई है। जिसको लेकरअनुमान है कि इस साल चावल के उत्पादन में 20 प्रतिशत की कमी आ सकती है।मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जून और जुलाई में बारिश सामान्य से 37 प्रतिशत कम हुई है। जिसने ने धान की रोपाई की गति को धीमा कर दिया है।

अब तक 55 प्रतिशत धान की रोपाई

बारिश के कमी के कारण कुछ किसानों ने रोपाई के लिए वैकल्पिक सिंचाई विधियों का सहारा लिया है, लेकिन अब उनके सामने अपनी फसलों को बचाने की चुनौती है। औरंगाबाद, बांका, गया, अरवल, जहानाबाद, नवादा और लखीसराय जैसे जिलों में अभी तक केवल 12 से 40 प्रतिशत धान की रोपाई पूरी हो पाई है। इसके विपरीत सारण, भोजपुर और पटना जैसे जिलों में 40 से 50 प्रतिशत रोपाई हुई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि 31 जुलाई तक रोपाई पूरी हो जाने पर धान की पैदावार में सुधार होता है।

Monsoon सामान्य से 20 से 40 प्रतिशत कम बारिश

मौसम विभाग के अनुसार 15 जिलों में सामान्य से 20 से 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है।जिसको लेकर सरकार ने पंप सेट से सिंचाई के लिए डीजल सब्सिडी देने का फैसला किया है। कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि धान की रोपाई में देरी अपर्याप्त बारिश के कारण हो रही है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्थिति की समीक्षा कर डीजल सब्सिडी योजना को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। पांच-छह दिन पहले मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कृषि विभाग ने डीजल अनुदान के लिए पोर्टल खोल दिया गया है और किसानों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

(क्रेडिट -मीडिया इनपुट)

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