अकबर और हिंदू राजाओं के बीच टकराव
अकबर ने बूंदी के हाड़ा शासक से कहा कि उनकी बेटी का विवाह शहजादे सलीम से होना चाहिए। इस प्रस्ताव को सुनकर सभी हिंदू राजाओं ने चुप्पी साध ली और नजरें झुका लीं।
लेकिन सिवाना के वीर कल्ला राठौड़ निर्भीकता से अकबर की ओर देखने लगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मेरी राजकुमारी का विवाह सिर्फ मेरे साथ होगा।”
यह सुनकर अकबर समझ गया कि यह राजकुमार किसी भी कीमत पर झुकने वाला नहीं है। कल्ला राठौड़ ने अंततः अपनी राज्य की राजकुमारी से विवाह किया और इस तरह हिंदू नारी की अस्मिता की रक्षा की।
लाहौर का मोर्चा और वीरगति
कल्ला राठौड़ के इस साहस से अकबर क्रोधित हो उठा। उसने उन्हें लाहौर के युद्ध मोर्चे पर भेज दिया।
युद्ध के दौरान कल्ला राठौड़ ने अभूतपूर्व वीरता दिखाई। कहा जाता है कि उनका सिर कट जाने के बाद भी उनका धड़ दुश्मनों से लड़ता रहा। यह दृश्य देखकर शत्रु भयभीत हो गए।
उनकी वीरता और बलिदान की मिसाल आज भी राजस्थान के इतिहास और साहित्य में दी जाती है।
इतिहास और साहित्य में अमर गाथा
कविराज श्यामलदास ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘वीर विनोद’ में लिखा है कि कल्ला राठौड़ ने अपने प्राणों की आहुति देकर सिवाना की रक्षा की और इतिहास में अमर हो गए।
उनकी वीरता के अनेक किस्से आज भी डिंगल भाषा की कविताओं और दोहों में गाए जाते हैं।
आज भी जीवित है स्मृति
आज भी सिवाना का दुर्ग कल्ला राठौड़ की शौर्यगाथा का साक्षी है।
हर साल उनके बलिदान और वीरता को याद करने के लिए समारोह आयोजित किए जाते हैं।