दिल्ली की संसद में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है—चुनाव लड़ने की उम्र घटाने को लेकर।
अभी तक नियम ये कहता है कि संसद या विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए आपकी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए। लेकिन संसद की स्थायी समिति ने कहा है—”क्यों न इसे घटाकर 21 साल कर दिया जाए?”
समिति की राय
बीजेपी सांसद बृजलाल इस समिति की अगुवाई कर रहे हैं। उनका तर्क है कि दुनिया बदल रही है, युवा ज्यादा जागरूक और आधुनिक सोच वाले हो चुके हैं। कई देशों जैसे कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में वोट डालने और चुनाव लड़ने की उम्र एक जैसी है।
अगर भारत में भी ऐसा किया जाए तो युवाओं को लोकतंत्र की असली जिम्मेदारी जल्दी समझने और निभाने का मौका मिलेगा।
चुनाव आयोग का विरोध
लेकिन यहां एक पेंच है।
जब यह सिफारिश चुनाव आयोग तक पहुँची, तो उन्होंने साफ कहा—”हम इसके पक्ष में नहीं हैं।”
उनका तर्क है कि भले ही 18 साल का लड़का या लड़की वोट डाल सकता है, लेकिन 21 साल की उम्र में संसद या विधानसभा जैसे बड़े पद को समझने और संभालने की परिपक्वता नहीं आती। इसलिए 25 साल की उम्र सही है।
युवाओं पर असर
अगर यह बदलाव हो जाता है तो देशभर के लगभग 8 करोड़ युवा सीधे चुनाव लड़ने के हकदार बन जाएंगे।
भारत में करीब 99 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 20 से 29 साल की उम्र के लगभग 19 करोड़ 74 लाख वोटर हैं। इनमें भी 21 से 25 साल के करीब 8 करोड़ वोटर आते हैं। यानी इतना बड़ा युवाशक्ति समूह राजनीति में कदम रख सकता है।
पहले भी हुई थी कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब ऐसी बात उठी हो।
2023 में संसद की स्थायी समिति ने और भी बड़ा सुझाव दिया था—कि चुनाव लड़ने की उम्र 25 साल से घटाकर सीधे 18 साल कर दी जाए। लेकिन तब भी यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
आगे क्या?
अब यह रिपोर्ट विधि और न्याय मंत्रालय को भेजी गई है। मंत्रालय इसे अलग-अलग विभागों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और युवा संगठनों के साथ मिलकर चर्चा करेगा। तभी तय होगा कि भारत में युवा नेता 21 साल की उम्र में संसद पहुँच पाएंगे या नहीं।