पटना। आदि काल से ही भारत धार्मिक आस्थाओं को मानने वाला देश रहा है। यहां धर्म, आस्था, आदि की कोई एक निश्चित परिभाषा के बदले मान्यताओं और विश्वास को प्राथमिकता दी जाती रही हैं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण यहाँ की मान्यताओं में लचीलापन का होना है। लोग अपने विश्वास को ना सिर्फ प्राथमिकता देते हैं, बल्कि बीतते समय के साथ यह मान्यता भी मान ली जाती है। यही वजह है इस देश में न तो मंदिरों की कमी है और नहीं पूजे जाने वालों की। सबसे सटीक उदाहरण तो यह है कि भूमि के टुकड़े को यह देश मां का दर्जा देता है। जो सिर्फ दिखावटी नहीं है। बल्कि यह धरातल पर भी दिखता है। भारत को सिर्फ राष्ट्र ना मानते हुए इसे माता के रूप में पूजा भी जाता हैं। देश भर में कई जगहों पर Bharat Mata Mandir का निर्माण किया गया हैं। ये मंदिर अपनी भव्यता और वैभवता के कारण लोकप्रिय भी है। जो न सिर्फ देश के लोगों को बल्कि विदेशी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
Bharat Mata Mandir : प्रसिद्ध भारत माता मंदिर कहाँ स्थित है?
- हरिद्वार का भारत माता मंदिर
उत्तराखंड के हरिद्वार शहर को भगवान विष्णु के मृत्युलोक में प्रवेश द्वार माना जाता है। यह शहर गंगा के तट पर स्थित है। पुराणों के अनुसार इस शहर को मायापुरी और गंगा द्वार के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थित है भारत माता को समर्पित Bharat Mata Mandir। 1983 में निर्मित यह मंदिर प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने बनवाया था। मंदिर का उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। मंदिर 180 फीट ऊंचा है। जिसमें कुल 8 मंजिलें हैं। जो देश के प्रमुख हस्तियों को समर्पित हैं। मंदिर के दूसरी मंजिल उन सभी प्रमुख हस्तियों को समर्पित है जिन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति दी। इस मंजिल पर स्वतंत्रता सेनानियों और देशभक्तों के मूर्ति स्थापित है। इसे शूर मंदिर कहा जाता हैं। तीसरे मंजिल को मातृ मंदिर की उपमा दी गई हैं। जो भारतीय इतिहास की सभी मातृ आकृतियों को समर्पित है। चौथी मंजिल पर जैन धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म सहित विभिन्न भारतीय धर्मों के महान संतों को दर्शाया गया है। संतों के करंब इसे संत मंदिर नाम दिया गया है। पाँचवीं मंजिल पर एक बड़ा हॉल है, जिसमें विभिन्न प्रांतों के इतिहास और सुंदरता को दर्शाने वाली पेंटिंग्स बने हुए हैं। छठी मंजिल को ‘शक्ति मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। इस मंजिल पर देवी सरस्वती, दुर्गा और पार्वती आदि शक्ति की प्रतिमाएं है। सातवीं मंजिल पर भगवान विष्णु के 10 अवतारों को दर्शाया गया हैं तो आठवीं मंजिल पर भगवान शिव को समर्पित है। जहां शिव की मूर्ति को हिमालय पर्वत की पृष्ठभूमि के साथ ध्यान मुद्रा में दर्शाया गया है।
- ऐसा मंदिर जहां भारत के अखंड मानचित्र की पूजा की जाती है
काशी विद्यापीठ के केंद्रीय कार्यालय के पास स्थित भारत माता मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से हैं जहां यह भगौलीक भूभाग प्रतीक के रूप में अवस्थित है। 1936 में लाल पत्थर से निर्मित यह मंदिर एक अद्वितीय वास्तुशिल्प को प्रदर्शित करता है। मंदिर के गर्भगृह में भारत माता का भौगोलिक मानचित्र है। ऐसा मानचित्र अन्यत्र उपलब्ध नहीं होने के चलते यह ऐतिहासिक खजाना है। मंदिर के गर्भ गृह में निर्मित यह यह मानचित्र सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित भारत के 1917 के मानचित्र को छह वर्षों की अवधि में पाँच गुना बड़ा करके बनाया गया था। इसमें कई विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जिसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम तक 32 फीट 2 इंच और उत्तर से दक्षिण तक 30 फीट 2 इंच है। इसमें 726 वर्गाकार सफेद संगमरमर के स्लैब शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की माप 11 इंच है। मानचित्र में हिमालय और अन्य पर्वतों की 450 चोटियाँ, विभिन्न आकारों की 800 नदियाँ, तथा प्रमुख शहर, तीर्थ स्थल, प्रांत और प्राकृतिक स्थल प्रदर्शित हैं। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित “वंदे मातरम” का शिलालेख है। पूरी इमारत एक ऊँचे मंच पर स्थित है। संरचना दो खंडों में विभाजित है, जिसमें निचली दीवारें सूर्य से ग्रहों की आनुपातिक दूरी को दर्शाती हैं। इसके अतिरिक्त, लिपि चिह्न भी बनाए गए हैं। इसके साथ साथ चित्रण वाले अन्य पैनल भी हैं, जो समय के साथ और आगंतुकों की उपेक्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भारत के मानचित्र की उपस्थिति भारतीयों के अपनी भारत माता के प्रति गहरे लगाव को दर्शाती है।