Bihar MLC Election : नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. जून में होने वाले बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए खेमे में लगातार मंथन जारी है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री खेमे से जुड़े दो बड़े चेहरों स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की तैयारी चल रही है.
बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए खेमे में मंथन
निशांत कुमार जो हाल ही में Janata Dal (United) से जुड़े हैं, फिलहाल बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वे अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, ऐसे में उन्हें विधान परिषद चुनाव के जरिए सदन में भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जेडीयू उन्हें उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख Upendra Kushwaha के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है. दीपक प्रकाश भी फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. माना जा रहा है कि एनडीए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने के लिए उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है.
जून में खाली हो रही हैं नौ सीटें
बिहार विधान परिषद की कुल नौ सीटें जून में खाली हो रही हैं. इनमें कई प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. भाजपा से Samrat Choudhary के इस्तीफे के बाद एक सीट खाली हुई है, जबकि संजय प्रकाश का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. जेडीयू कोटे से भगवान सिंह कुशवाहा के इस्तीफे के अलावा कुमुद वर्मा, गुलाम गौस और भीष्म साहनी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. वहीं विपक्षी दलों में राजद के सुनील सिंह और मोहम्मद फारूक तथा कांग्रेस के समीर सिंह का कार्यकाल 28 जून को समाप्त होगा.
नीतीश कुमार की सीट पर भी होगा उपचुनाव
सबसे अहम मामला Nitish Kumar की विधान परिषद सीट का है. उन्होंने 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की थी. उनका विधान परिषद कार्यकाल वर्ष 2030 तक था, ऐसे में अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा.
सीट शेयरिंग पर NDA में मंथन
सूत्रों के मुताबिक, एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर भी बातचीत जारी है. Lok Janshakti Party (Ram Vilas) यानी चिराग पासवान की पार्टी को भी एक सीट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में एनडीए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी. ऐसे में उम्मीदवारों के चयन को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.