केरल में कांग्रेस का संघर्ष खत्म..विधायकों के समर्थन के बिना वी डी सतीशन कैसे बने मुख्यमंत्री ?

Who is kerala new chief minister : विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद केरल की राजनीति में पिछले दस दिनों तक चला कांग्रेस का अंदरूनी संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया. पार्टी ने छह बार के विधायक और नेता प्रतिपक्ष V. D. Satheesan को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. अब वही केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे. रिपोर्ट्स की मानें तो आसना दिखने वाला यह फैसला उतना भी सरल नहीं था जितना की यह लग रहा. क्योंकि कई दावेदारों में नंबर वन होने और विधायक दल में बहुमत समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस के लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री नहीं बन सके. स्थानीय समिकरणों को तरजीह देते हुए पार्टी हाईकमान ने अंततः जनभावना, सहयोगी दलों के दबाव और संगठनात्मक संकेतों को देखते हुए सतीशन के पक्ष में फैसला किया.

 सतीशन के पक्ष में कैसे आया फैसला

जानकारों की मानें और मीडिया रिपोर्ट को समझे तो मालूम होता है कि सतीशन के पक्ष में आया यह फैसला सीधे शब्दों की खबर नहीं हैं. इसके लिए 5 साल पीछे जाना होगा जब 2021 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ को बड़ी हार मिली थी. रमेश चेन्नीथला उस समय नेता प्रतिपक्ष थे और मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे थे. लेकिन पार्टी की हार से अगले पांच वर्षों में राजनीतिक समीकरण बदल गए. उसके बाद फिर बेहतर प्रदर्शन करते हुए, 2024 लोकसभा चुनाव में यूडीएफ ने केरल की 20 में से 18 सीटें जीतीं. उसके बाद 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में भी यूडीएफ को बड़ी सफलता मिली और इसके बाद 2026 विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की. जहां कांग्रेस अकेले 63 सीटों तक पहुंच गई. अब जाहिर सी बात है लगातार बेहतर प्रदर्शन के पीछे कोई एक नाम नहीं होगा. तो 2026 विधानसभा चुनाव के जीत ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ को निर्णायक बना दिया और कई सारे दावेदारों के नाम आने लगे.

तीन बड़े दावेदार

दावेदारों की लिस्ट में पहले नंबर था केरल विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्नीथला का. चार बार सांसद, पूर्व गृह मंत्री, यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, 2021 से पहले पांच वर्षों तक नेता प्रतिपक्ष 71 वर्षीय चेन्नीथला को उम्मीद थी कि वरिष्ठता के आधार पर हाईकमान उन्हें मौका देगा. रमेश चेन्नीथला लंबे समय से केरल कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं लेकिन उनके नाम पर मुहर नहीं लगी. लिस्ट में दूसरा नाम था राहुल गांधी के करीबी नेता मानें जाने वाले लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल का. केसी वेणुगोपाल को गांधी परिवार का सबसे भरोसेमंद संगठनात्मक चेहरा माना जाता है. कांग्रेस संगठन महासचिव का पद , टिकट वितरण में प्रभाव, विधायकों पर मजबूत पकड़ और दिल्ली दरबार में सीधी पहुंच के कारण लगभग यह फाईनल हो गया था कि केसी वेणुगोपाल ही सीएम होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. मीडिया रिपोर्ट की माने तो विधायक दल के 63 में से लगभग 46 विधायक उनके समर्थन में थे.

लिस्ट में एक नाम था वी डी सतीशन का जो पिछले पांच वर्षों से विधानसभा में Pinarayi Vijayan सरकार के सबसे आक्रामक विरोधी रहे. इस दौरान भ्रष्टाचार और लॉटरी घोटालों पर हमलावर राजनीति, विधानसभा में लगातार सक्रियता और राज्यव्यापी पदयात्रा से आम जनमानस में उनकी पहचान बनी. सतीशन ने चुनाव से पहले दावा किया था कि यदि यूडीएफ 100 सीटें नहीं जीतती तो वह राजनीति छोड़ देंगे. यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर उनके दावे को सही साबित किया. इन सबको मिलाकर जमीन पर उनके नाम की लहर थी जिसको देखते हुए केरल के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर वी डी सतीशन का नाम पर मुहर लग गई.

विधायकों का समर्थन बनाम जनता का दबाव

7 मई को कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने तिरुवनंतपुरम में विधायकों से राय ली. मीडिया सूत्रों के अनुसार 46 विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में, 9 विधायक सतीशन के साथ और कुछ विधायक चेन्नीथला के समर्थन में थे. लेकिन इसके बाद स्थिति बदल गई. केरल भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सतीशन के समर्थन में अभियान शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर पोस्टर, वीडियो और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन होने लगे. कई विधायकों को कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने वेणुगोपाल का समर्थन किया था.

वी डी सतीशन के साथ सहयोगियों का भरोसा

सबसे निर्णायक भूमिका निभाई Indian Union Muslim League ने. यूडीएफ के इस सहयोगी दल के पास 22 विधायक हैं. IUML नेतृत्व सतीशन को पसंद करता था क्योंकि वह खुलकर सेकुलर राजनीति की बात करते रहे थे, उन्होंने जातीय संगठनों के राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध किया और मुस्लिम लीग के साथ उनका तालमेल मजबूत था. इसके अलावा Kerala Congress (Joseph) के 7 विधायक, आरएलएसपी के 3 विधायक भी सतीशन के पक्ष में बताए गए. 14 मई को दिल्ली में Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra ने तीनों दावेदारों से बातचीत की. केसी वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि विधायक दल में बहुमत का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने 2018 मध्य प्रदेश का उदाहरण दिया, जब बहुमत के आधार पर Kamal Nath को मुख्यमंत्री बनाया गया था. लेकिन हाईकमान का झुकाव सतीशन की ओर था. सूत्रों के अनुसार सहयोगी दल सतीशन के पक्ष में थे. केरल कांग्रेस के नेता पब्लिक सेंटिमेंट की बात कर रहे थे. A. K. Antony ने भी सलाह दी कि जनता की भावना का सम्मान होना चाहिए, इसके बाद राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि विधायक दल का नेता वी डी सतीशन होंगे.

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