RJD politics : बिहार की सत्ता में वापसी को लेकर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव नया संगठनात्मक दांव खेलने वाले हैं और इसको लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी में दिखाई दे रही है. सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार के अगले ही दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संकेत दे दिए हैं कि पार्टी अब संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों स्तर पर नई रणनीति पर काम करेगी. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट की मानें तो यह RJD की A टू Z राजनीति से वापस पारंपरिक MY(मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले की ओर लौटने का संकेत है.
संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि हम लोग अपने संगठन को पूरी तरीके से रिफॉर्म करने जा रहे हैं. हम अपने कैडर को मजबूत करेंगे. जिला से लेकर प्रकोष्ठ तक में सिद्धांत और विचारधारा को मानने वाले लोगों को ही जगह दी जाएगी. तेजस्वी यादव ने साफ कहा है कि पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल होगा. जिला इकाइयों से लेकर विभिन्न प्रकोष्ठों तक नए चेहरे लाए जाएंगे. पार्टी नेतृत्व का फोकस ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं पर होगा जो पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हों. रिपोर्ट के मुताबिक तेजस्वी यादव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं. नए संगठनात्मक ढांचे पर मंथन जारी है और जल्द ही प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक नई टीम की घोषणा हो सकती है.
A टू Z फॉर्मूला क्यों पड़ा कमजोर?
2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने टिकट वितरण में बड़ा प्रयोग किया था. RJD ने लालू प्रसाद यादव के लंबे समय से चले आ रहे MY समीकरण से बाहर निकलते हुए अन्य जातियों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की. इसे A टू Z सामाजिक समीकरण कहा गया. इस रणनीति के तहत पार्टी ने यादव उम्मीदवारों की संख्या घटाकर भूमिहार, कुशवाहा और अन्य पिछड़ी जातियों को अधिक टिकट दिए. लेकिन चुनावी नतीजों ने पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए. विधानसभा चुनाव में RJD की सीटें 75 से घटकर 25 पर सिमट गईं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह संभाल नहीं पाई, जबकि नए सामाजिक समूहों में भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका.
विधानसभा में फेल हो गया लोकसभा वाला दांव
2024 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने खास तौर पर कुशवाहा समाज पर फोकस किया था. महागठबंधन ने कुल 40 सीटों में से 7 कुशवाहा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिनमें 3 उम्मीदवार RJD के थे. इनमें से जहानाबाद सीट से अभय कुशवाहा जीत दर्ज करने में सफल रहे. बाद में उन्हें लोकसभा में पार्टी का नेता भी बनाया गया. इसे कुशवाहा समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश माना गया था. इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भी RJD ने सामाजिक संतुलन बदलने का प्रयास किया. यादव उम्मीदवारों की संख्या 58 से घटाकर 51 कर दी गई. वहीं भूमिहार उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाकर 6 और कुशवाहा उम्मीदवारों की संख्या 8 से बढ़ाकर 16 कर दी गई.
वोट ट्रांसफर में नहीं मिला फायदा
चुनाव में टिकट वितरण में बदलाव के बावजूद RJD को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला. पोस्ट पोल सर्वे में यह सामने आया कि कुशवाहा वोटरों का समर्थन महागठबंधन को सीमित स्तर पर ही मिला. रिपोर्ट में एक्सिस माय इंडिया के सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल 24 प्रतिशत कुशवाहा मतदाताओं ने महागठबंधन को वोट दिया, जो 2020 के मुकाबले 3 प्रतिशत कम था. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सामाजिक इंजीनियरिंग के इस प्रयोग में RJD का पारंपरिक यादव और मुस्लिम वोट बैंक भी कुछ हद तक असंतुष्ट दिखाई दिया.
क्या फिर मजबूत होगा MY समीकरण?
RJD की राजनीति लंबे समय तक मुस्लिम-यादव गठजोड़ पर आधारित रही है. लालू प्रसाद यादव के दौर में यही समीकरण पार्टी की सबसे बड़ी ताकत माना जाता था. लेकिन तेजस्वी यादव ने पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की छवि को व्यापक बनाने की कोशिश की. अब संगठन में बदलाव और वैचारिक कार्यकर्ताओं पर जोर को राजनीतिक जानकार MY समीकरण को फिर मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं. हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक औपचारिक रूप से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है.
बिहार यात्रा पर निकलेंगे तेजस्वी
उधर जानकारी यह भी है कि तेजस्वी यादव जल्द ही बिहार दौरे पर भी निकलने वाले हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा का पूरा ब्लूप्रिंट प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल तैयार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का मुख्य फोकस महिलाओं को आर्थिक सहायता, युवाओं को रोजगार, मुफ्त बिजली और सरकार के वादों जैसे मुद्दों पर रहेगा. इसके साथ साथ महिलाओं के पैसे, सरकार के वादे, जनता को फ्री बिजली और युवाओं के रोजगार के मुद्दे को विपक्ष सड़क से सदन तक उठाएगी.
क्या है राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि RJD अब 2025 के चुनावी परिणामों की समीक्षा करते हुए अपने कोर वोट बैंक को दोबारा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. संगठनात्मक बदलाव के जरिए पार्टी जमीनी कैडर को सक्रिय करना चाहती है, जबकि सामाजिक समीकरणों को लेकर भी नए सिरे से संतुलन बनाने की कोशिश जारी है. अब देखने वाली बात होगी कि तेजस्वी यादव की यह नई रणनीति RJD को फिर से बिहार की राजनीति में मजबूत स्थिति दिला पाती है या नहीं.