NDA में अब JDU-BJP बन गए जुड़वा भाई..! चुनाव के बाद नीतीश के मुख्यमंत्री बनने पर मंडराया खतरा

Bihar election 2025 : राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 12 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग का फार्मूला घोषित किया. इस घोषणा के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो गया. पहली बार ऐसा हुआ जब जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बराबर-बराबर 101-101 सीटें दी गईं. कागज पर यह समान साझेदारी भले दिखती हो, लेकिन राजनीतिक रूप से यह JDU के लिए एक मनोवैज्ञानिक झटका है, क्योंकि अब तक नीतीश कुमार की पार्टी हमेशा गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में रही है.

JDU के बड़े भाई होने का टूटा सिलसिला

2005 से लेकर अब तक NDA के हर विधानसभा चुनाव में JDU को BJP से ज्यादा सीटें मिलती रही हैं. 2010 में JDU ने 141 सीटों पर और BJP ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2020 में भी जब JDU कमजोर स्थिति में थी, तब भी उसे 115 सीटें दी गईं, जबकि BJP को उससे 5 सीटें कम मिलीं. लेकिन इस बार स्थिति पलट गई. NDA की नई गणित में दोनों पार्टियां बराबर हैं और यहीं से शुरू होता है JDU के लिए चुनौती का नया अध्याय. पार्टी के भीतर इसे सम्मान में कटौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नीतीश कुमार की पूरी राजनीति संख्या से नहीं, संतुलन से चलती रही है. असल में यह बराबरी अचानक नहीं आई. इसकी नींव 2024 के लोकसभा चुनाव के समय रखी जा चुकी थी. तब पहली बार ऐसा हुआ कि BJP ने JDU से एक सीट ज्यादा पर चुनाव लड़ा. 2019 तक दोनों बराबर थे, और 2024 में BJP ने आगे निकलकर यह संकेत दे दिया था कि NDA में अब रिश्ते समान साझेदारी के दौर में प्रवेश कर चुके हैं.

15 साल में JDU की 29% सीटें कम

अगर JDU के गठन (2003) से अब तक के सीट शेयरिंग इतिहास को देखा जाए, तो पार्टी की स्थिति साफ झलकती है. 2005 में JDU ने 138 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2010 में यह संख्या 141 पर पहुंची, लेकिन अब 2025 में घटकर 101 पर आ गई है. यानी 15 साल में JDU की लगभग 29% सीटें घट गईं. इसके उलट BJP 2005 में भी 101 सीटों पर लड़ी थी और अब भी 101 सीटों पर लड़ रही है. यानी JDU जहां सिकुड़ती जा रही है, वहीं BJP अपनी स्थिति स्थिर रखते हुए राजनीतिक रूप से और प्रभावशाली हो गई है.

BJP ने सीट बंटवारे का आधार 2024 लोकसभा परिणामों को बनाया है. चूंकि लोकसभा में दोनों दलों की सीटें बराबर रहीं, इसलिए विधानसभा में भी बराबर की हिस्सेदारी तय हुई. छोटे सहयोगियों LJP (रामविलास), हम (Hindustani Awam Morcha), और RLSP (उपेंद्र कुशवाहा) को भी उसी अनुपात में सीटें दी गई हैं. सबसे ज्यादा खुश चिराग पासवान नज़र आते हैं, जिन्हें 29 सीटें दी गईं उम्मीद से ज़्यादा. BJP के भीतर यह समझ बनी कि पासवान वोटर अब मजबूती से LJP(R) के साथ है, और यह वोट बैंक NDA के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. कहा जा रहा है कि इस पूरी सीट शेयरिंग की जानकारी नीतीश कुमार को पहले से थी और सब कुछ उनकी सहमति से हुआ. दरअसल, नीतीश कुमार के पास इस समझौते को ठुकराने का विकल्प नहीं था. 2020 के चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें पता है कि BJP के बिना सत्ता में बने रहना मुश्किल है. यह भी सच है कि JDU का वोट शेयर अब अकेले चुनाव जीतने लायक नहीं रह गया है.

नीतीश के किंगमेकर बने रहने के लिए 50 सीटें जरूरी

नीतीश कुमार के लिए अब असली परीक्षा यही है कि वे कितनी सीटें जीतते हैं. अगर JDU 50 से कम सीटों पर सिमटती है, तो नीतीश का किंगमेकर दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है. 2020 में JDU ने 43 सीटें जीती थीं. अगर 2025 में भी प्रदर्शन वैसा ही रहा, तो BJP अपने सहयोगियों के साथ सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है ,बिना नीतीश की शर्तों के. BJP के सहयोगी (LJP, HAM, RLM) कुल 41 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. अगर इनमें से 20 सीटें भी NDA के खाते में गईं, तो भाजपा को बहुमत के लिए बस 28 सीटों की जरूरत होगी जो उसके लिए कठिन नहीं है. 2024 लोकसभा के विधानसभा-वार आंकड़े बताते हैं कि NDA को करीब 176 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी, यानी दो-तिहाई बहुमत. इनमें BJP को 68 और JDU को 74 सीटों पर बढ़त थी. अगर यही पैटर्न विधानसभा चुनाव में भी दोहराया गया, तो नीतीश कुमार एक बार फिर किंगमेकर की स्थिति में लौट सकते हैं. लेकिन अगर JDU की संख्या 50 से नीचे रही, तो गठबंधन के भीतर उनका प्रभाव सीमित रह जाएगा.

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