चिराग अपना रहे तेवर तल्ख तो सहनी का भी डोल रहा मन…कहां उलझ रही एनडीए और महागठबंधन में सीटों का बंटवारा ?

Bihar Seat Sharing Updates :  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों गठबंधनों में घमासान मचा हुआ है। दोनों ही खेमों में सहयोगी दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। राजनीतिक गलियारों में भले ही यह संदेश दिया जा रहा हो कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा लगभग फाइनल हो गया है और एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दोनों गठबंधन इस समय अंदरूनी खींचतान से जूझ रहे हैं और हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो 2020 की तरह इस बार भी बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

महागठबंधन में बढ़ी तकरार

महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के बीच ही नहीं बल्कि अन्य सहयोगियों के साथ भी तालमेल की राह मुश्किल हो रही है। सबसे बड़ी अड़चन विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी और माक्र्सवादी लेनिनवादी (माले) की मांगों को लेकर खड़ी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुकेश सहनी उप मुख्यमंत्री पद की गारंटी के साथ 25 से अधिक सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि माले ने 30 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। दोनों दलों ने हालिया बैठकों में साफ शब्दों में कहा कि हमारे सामने सभी विकल्प खुले हैं। इधर, कांग्रेस भी राजद के रुख से नाराज बताई जा रही है। कांग्रेस को जिन सीटों की पेशकश की जा रही है, उस पर अब दिल्ली में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में फैसला होगा।

130 सीटों से नीचे आने को तैयार नहीं RJD

महागठबंधन में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तेजस्वी यादव किसी भी हाल में 130 सीटों से नीचे आने को तैयार नहीं हैं। इस वजह से सहयोगियों के साथ तालमेल कठिन हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में महागठबंधन की एक और बैठक होने वाली है, जिसमें समझौते की कोशिश होगी। लेकिन अगर इसमें भी सहमति नहीं बनती है, तो गठबंधन में दरार गहराने की आशंका है। इसी बीच, मुकेश सहनी की हाल की राजनीतिक गतिविधियों ने अटकलों को और हवा दे दी है। बताया जा रहा है कि सहनी ने कल देर रात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

एनडीए में भी फंसा पेंच

एनडीए में भी सीट बंटवारे पर तकरार कम नहीं है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान 36 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं। भाजपा और जदयू की ओर से उन्हें मनाने की तमाम कोशिशें अब तक विफल रही हैं। चिराग का रुख बेहद सख्त है। सूत्रों का दावा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने तक का बड़ा फैसला ले सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि चिराग कांग्रेस और प्रशांत किशोर से भी संपर्क में हैं।

एनडीए के भीतर जदयू और भाजपा दोनों ही सौ-सौ सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं। हालांकि, एनडीए के एक अन्य सहयोगी जीतन राम मांझी को भाजपा ने शांत कर दिया है, लेकिन चिराग को मनाना आसान नहीं दिख रहा।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

सीट बंटवारे पर यह खींचतान ऐसे समय में सामने आई है जब चुनावी तारीखों का ऐलान हो चुका है और सभी दलों को तेजी से अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं बदली और दोनों गठबंधनों में मतभेद गहराते रहे, तो चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, महागठबंधन और एनडीए दोनों ही अपने-अपने सहयोगियों को मनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन जिस तरह से मांगें ऊंची और समझौते की गुंजाइश कम होती दिख रही है, उससे यह साफ झलक रहा है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा खेला संभव है।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख गठबंधन संकट में फंसे हुए हैं। महागठबंधन में जहां सहनी, माले और कांग्रेस की नाराजगी चुनौती बन गई है, वहीं एनडीए को चिराग पासवान के तेवरों से मुश्किल हो रही है। अब सभी की नजर आने वाली बैठकों पर है, जहां होने वाले फैसले से यह तय होगा कि क्या दोनों गठबंधन मतभेदों को सुलझा पाएंगे या फिर चुनाव से पहले ही दरार गहरा जाएगी।

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