Shashi tharoor : राजगीर में आयोजित नालंदा साहित्य उत्सव के दूसरे दिन कांग्रेस सांसद और प्रख्यात लेखक डॉ. शशि थरूर ने बिहार में आए बदलावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों बाद बिहार आए हैं और राज्य की स्थिति में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है।
विकास मॉडल देख चकित हुए शशि थरूर
डॉ. थरूर ने कहा कि मैं बहुत साल पहले यहां नहीं आया था। उस समय के बारे में सुना था कि हालात अच्छे नहीं थे, लेकिन आज का बिहार वाकई अच्छा लग रहा है। सड़कें बेहतर हैं, रात के वक्त लोग बेझिझक घरों से बाहर निकल रहे हैं। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर सकारात्मक बदलाव नजर आता है।
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नालंदा विश्वविद्यालय को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत है। इसे आगे ले जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से नालंदा विश्वविद्यालय को पूरा समर्थन देने की अपील की। डॉ. थरूर ने कहा कि नालंदा ज्ञान की विरासत की स्थली रही है। करीब 20 साल पहले मैंने इस विषय पर लिखा था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने नालंदा को पुनर्जीवित करने की बात कही थी। हमें 21वीं सदी में इसे वैश्विक स्तर का संस्थान बनाना चाहिए।
राजगीर में नालंदा साहित्य उत्सव
शिक्षा और शोध के मुद्दे पर बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने कहा कि देश में दुनिया की लगभग 17 प्रतिशत प्रतिभाएं मौजूद हैं, लेकिन वैश्विक रिसर्च आउटपुट में भारत की हिस्सेदारी मात्र 2.7 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे और शोध पर बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र को भी आगे आकर रिसर्च और इनोवेशन में धन खर्च करना चाहिए, तभी भारत ज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा।