दही-चूड़ा की थाली और बिहार का सियासी जायका…मकर संक्रांति भोज से क्या है तेज प्रताप यादव का राजनीतिक संदेश

Tej Pratap Yadav Politics : बिहार की राजनीति में चुरा-दही का स्वाद कोई नया नहीं है. मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाला ये सियासी भोज कई बार सत्ता के समीकरणों की दिशा तय करते रहे हैं. कभी सरकार बनने-बिगड़ने की पटकथा यहीं लिखी गई, तो कभी नए गठजोड़ की नींव यहीं रखी गई. इसी परंपरा के बीच इस बार राजनीति के केंद्र में हैं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और परिवार व पार्टी से अलग हो चुके तेज प्रताप यादव. भले ही पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हों, लेकिन इन दिनों वे अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल की जमीन मजबूत करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं.

पाला बदल सकते है तेज प्रताप ?

सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि तेज प्रताप जल्द ही पाला बदल सकते हैं. अटकलें यहां तक लगाई जा रही हैं कि वे एनडीए का दामन थाम सकते हैं. हालांकि जानकारों का मानना है कि फिलहाल ऐसा कोई बड़ा फैसला लेने के मूड में तेज प्रताप नहीं हैं. खुद तेज प्रताप भी अपने बयानों में यही संकेत दे रहे हैं कि वे लंबी राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं, न कि जल्दबाज़ी में कोई कदम उठाने वाले हैं.

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दरअसल, इन अटकलों को हवा तब मिली जब तेज प्रताप यादव बीते दिनों लगातार भाजपा, जदयू और राजद के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करते नजर आए. मकर संक्रांति के अवसर पर जनशक्ति जनता दल द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज के लिए उन्होंने एक-एक कर तमाम दिग्गज नेताओं को आमंत्रित किया. सबसे पहले उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात की, फिर इसके बाद एनडीए के कई बड़े नेताओं से संपर्क कर उन्हें भोज का न्योता दिया. जब मीडिया ने इन मुलाकातों के सियासी मायने निकाले तो तेज प्रताप ने सफाई देते हुए कहा कि त्योहारों के मौके पर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद और औपचारिक मुलाकातें होती रहती हैं, इसका कोई अलग राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. लेकिन सियासत में इत्तेफाक कम ही होते हैं.

क्या है तेज प्रताप यादव का सियासी संदेश

विजय सिन्हा के भोज में शामिल होने के बाद तेज प्रताप यादव ने एक और बड़ा सियासी संदेश दिया. पार्टी और परिवार से निष्कासित होने के बाद वे पहली बार अपने पिता लालू प्रसाद यादव, छोटे भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी से मिलने पहुंचे. राबड़ी आवास पर हुई यह मुलाकात करीब आठ महीने बाद परिवार के साथ उनकी पहली नजदीकी मानी जा रही है. तेज प्रताप ने इस मुलाकात को सोशल मीडिया पर भावुक शब्दों में साझा किया और परिवार को 14 जनवरी को होने वाले चूड़ा-दही भोज का निमंत्रण भी दिया. तस्वीरों में दिखी पारिवारिक गर्मजोशी ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.

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पहले एनडीए के नेताओं के साथ मंच साझा करना और फिर परिवार के साथ एकजुटता दिखाना, इन दोनों घटनाओं को लेकर सियासी मायने ढूंढा जा रहा है. माना जा रहा है कि तेज प्रताप अपनी सियासी जमीन दोबारा तैयार करने की कोशिश में हैं और सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं. फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में चूड़ा-दही सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि सियासी संकेतों की थाली है. और इस बार उस थाली के केंद्र में तेज प्रताप यादव हैं.

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