Iran protests live updates : मध्य-पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं. ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और तेहरान-वॉशिंगटन के बीच बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिका ने अपना शक्तिशाली जंगी बेड़ा मध्य-पूर्व की ओर रवाना कर दिया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम क्षेत्र में अमेरिकी हितों और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, लेकिन जानकार इसे संभावित युद्ध की आहट के तौर पर भी देख रहे हैं. अमेरिका का यह जंगी बेड़ा कोई साधारण नौसैनिक टुकड़ी नहीं है. इसमें दुनिया के सबसे बड़े और ताकतवर युद्धपोतों में से एक USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर (CVN-72) भी शामिल है. यह एयरक्राफ्ट कैरियर अपने साथ दर्जनों फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक निगरानी सिस्टम लेकर चलता है, जो किसी भी बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम माने जाते हैं.
क्या है कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 की ताकत?
अमेरिकी नौसेना का यह बेड़ा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (Carrier Strike Group-3) के तहत तैनात किया गया है. इसमें कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो दुश्मन के हवाई, समुद्री और मिसाइल हमलों से निपटने में सक्षम होते हैं. इसके अलावा इस ग्रुप में क्रूजर और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन भी शामिल हो सकती हैं, जिन पर लंबी दूरी तक मार करने वाली टोमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात रहती हैं. यह बेड़ा सिर्फ हमले के लिए ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से भी लैस होता है. यानी समुद्र, हवा और पानी के भीतर से होने वाले किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी तैयारी इसके पास होती है.
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ईरान में विरोध प्रदर्शन और ट्रंप की धमकियां
ईरान में इन दिनों सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इन प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की गई तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद ही अमेरिकी जंगी बेड़े की मूवमेंट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की यह सैन्य तैनाती ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है. इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अमेरिका किसी भी हाल में अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा.
युद्ध की आशंका या शक्ति प्रदर्शन?
हालांकि अमेरिकी प्रशासन इसे रूटीन डिप्लॉयमेंट और सुरक्षा इंतजाम का हिस्सा बता रहा है, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उससे युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. ईरान पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव से नाराज है और ऐसे में जंगी बेड़े की मौजूदगी हालात को और भड़का सकती है. मध्य-पूर्व में पहले से ही कई मोर्चों पर संघर्ष चल रहा है. ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी टकराव की स्थिति बनती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिकी जंगी बेड़े की इस मूवमेंट पर टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह कदम महज शक्ति प्रदर्शन है या फिर किसी बड़े सैन्य टकराव की भूमिका.