Bihar Politics : बिहार की राजनीति में एक बार फिर दही-चूड़ा चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार वजह सिर्फ मकर संक्रांति नहीं बल्कि उससे जुड़े राजनीतिक संकेत हैं. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में सियासी हलचल तेज कर दी है. इस भोज में जहां बीजेपी के बड़े नेता, राज्यपाल और एनडीए सरकार के मंत्री शामिल हुए, वहीं सबसे चौंकाने वाली मौजूदगी खुद लालू यादव की रही, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही अपने बेटे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था.
तेज प्रताप के बयान ने बढ़ाई सियासी अटकलें
कार्यक्रम के दौरान जब तेज प्रताप यादव से यह सवाल किया गया कि क्या वे बीजेपी के समर्थन से विधान परिषद (MLC) जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, मैं उसे निभाने को तैयार हूं. तेज प्रताप ने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को एनडीए की ओर झुकाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि मई 2025 में लालू यादव ने तेज प्रताप को अनुशासनहीन और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के आरोप में राष्ट्रीय जनता दल से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) का गठन किया. बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को करारी हार मिली और वे खुद भी चुनाव नहीं जीत सके. इसके बाद से ही वे राजनीतिक रूप से खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नए विकल्प तलाशते दिख रहे हैं.
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लालू की मौजूदगी क्या है सुलह के संकेत?
तेज प्रताप के कार्यक्रम में लालू यादव की मौजूदगी ने सबसे ज्यादा राजनीतिक संदेश दिया. भले ही उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की, लेकिन मंच पर बैठना और बेटे के साथ नजर आना यह संकेत देता है कि राजद परिवार में जमी बर्फ पिघलने लगी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तेज प्रताप को दोबारा मुख्यधारा की राजनीति में लाने की रणनीति हो सकता है. तेजस्वी यादव को भी कार्यक्रम का न्योता मिला था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए. इससे यह संदेश गया कि परिवार और पार्टी के भीतर अभी भी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.
बिहार की राजनीति में नई पटकथा?
तेज प्रताप यादव का बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करना, एनडीए नेताओं की मौजूदगी और लालू यादव का बदला हुआ रवैया , इन सबने बिहार की राजनीति में एक नई पटकथा लिखनी शुरू कर दी है. क्या तेज प्रताप एनडीए में शामिल होंगे? क्या लालू परिवार में सुलह की औपचारिक घोषणा होगी? क्या तेजस्वी और तेज प्रताप एक मंच पर नजर आएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं.