box office mathematics : बॉक्स ऑफिस नाम की बला को आप तो जानते ही होगें. यही वो जगह हैं फिल्मों को नंबर मिलते है. जैसे कि कौन सी फिल्म हिट रही या फ्लॉप हुई. लेकिन क्या आप जानते हैं यह क्राइटेरिया कैसे तय होता है ? अगर आपके दिमाग में भी यह कीड़ा है और आप बॉक्स ऑफिस के गणित को समझना चाहते हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए ही है. अक्सर दर्शकों के मन में सवाल उठता है कि ब्लॉकबस्टर, ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर, हिट, फ्लॉप या स्लीपर हिट जैसी कैटेगरी आखिर तय कैसे होती हैं. आइए विस्तार से समझते हैं फिल्म के हिट और फ्लॉप होने का पूरा गणित.
फिल्म के हिट या फ्लॉप होने का आधार क्या है?
किसी भी फिल्म का बॉक्स ऑफिस वर्डिक्ट तय करने में उसका बजट सबसे अहम भूमिका निभाता है. इसे समझने के लिए बजट के दो मुख्य हिस्सों को जानना जरूरी है. लैंडिंग कॉस्ट, इसमें फिल्म के निर्माण से जुड़े खर्च शामिल होते हैं, जैसे कलाकारों की फीस, तकनीकी टीम का खर्च, सेट, लोकेशन और अन्य प्रोडक्शन लागत. दूसरा होता है प्रिंट और विज्ञापन, फिल्म की मार्केटिंग, प्रमोशन और रिलीज से जुड़े खर्च इस श्रेणी में आते हैं.
कैसे तय होती है फिल्म की कैटेगरी?
फिल्म की कमाई को उसके कुल खर्च से तुलना कर उसका दर्जा तय किया जाता है. आमतौर पर इंडस्ट्री में निम्न मानक माने जाते हैं
- डिजास्टर – फिल्म अपनी लागत का 50% भी नहीं निकाल पाती.
- फ्लॉप – फिल्म अपने बजट से कम कमाई करती है.
- एवरेज – फिल्म अपनी लागत निकालकर मामूली मुनाफा कमाती है.
- हिट – फिल्म अपनी लागत से कम से कम 50% अधिक मुनाफा कमाती है.
- सुपरहिट – फिल्म अपनी लागत का दोगुना कमा लेती है.
- ब्लॉकबस्टर – फिल्म अपनी लागत से तीन गुना या उससे ज्यादा कमाई करती है.
- ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर – फिल्म पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए लागत से चार से पांच गुना तक कमाई कर ले और लंबे समय तक चर्चा में बनी रहे.
कैसे होती है फिल्मों की कमाई
आज के दौर में फिल्में रिलीज से पहले ही कमाई शुरू कर देती हैं. यह कमाई विभिन्न राइट्स बेचकर होती है:
- सैटेलाइट राइट्स – टीवी चैनलों को प्रसारण अधिकार बेचकर.
- डिजिटल राइट्स – ओटीटी प्लेटफॉर्म को फिल्म बेचकर.
- म्यूजिक राइट्स – गानों के अधिकार से होने वाली आय.
कई बार ऐसा होता है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रहती है, लेकिन इन राइट्स के जरिए निर्माता मुनाफा कमा लेते हैं. हालांकि हिट या फ्लॉप का आधिकारिक दर्जा बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के आधार पर ही तय किया जाता है.
फुटफॉल क्यों है अहम?
कमाई के साथ-साथ फुटफॉल यानी कितने लोगों ने टिकट खरीदे, यह भी महत्वपूर्ण पैमाना है. आज टिकट की कीमतें बढ़ चुकी हैं, जिससे 100 करोड़ का आंकड़ा पार करना अपेक्षाकृत आसान हो गया है. ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर का दर्जा पाने के लिए फिल्म के फुटफॉल भी बेहद ज्यादा होने चाहिए. उदाहरण के तौर पर शोले, हम आपके हैं कौन..! जैसी फिल्मों ने भारी फुटफॉल दर्ज किए थे और लंबे समय तक रिकॉर्ड कायम रखे.
स्लीपर हिट क्या होती है?
स्लीपर हिट वह फिल्म होती है जो बिना बड़े सितारों, भारी प्रमोशन या शुरुआती चर्चा के रिलीज होती है. शुरुआत में इसकी कमाई सामान्य रहती है, लेकिन सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ के चलते यह धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ती है और अंततः बड़ी सफलता हासिल कर लेती है. हाल के वर्षों में कांतारा, 12वीं फेल और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों को स्लीपर हिट की श्रेणी में रखा गया. इन फिल्मों ने साबित किया कि मजबूत कंटेंट ही असली स्टार होता है. फिल्म का हिट या फ्लॉप होना सिर्फ 100 करोड़ क्लब से तय नहीं होता. बजट, डिस्ट्रीब्यूटर शेयर, नॉन-थिएट्रिकल राइट्स और फुटफॉल, ये सभी मिलकर तय करते हैं कि फिल्म की असली स्थिति क्या है. बदलते दौर में बॉक्स ऑफिस का गणित और भी जटिल हो गया है.