Bihar politics : केरल में चुनाव प्रचार के दौरान Tejashwi Yadav के एक बयान को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. Rashtriya Janata Dal (आरजेडी) के नेता केरल में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में पहुंचे थे, जहां उन्होंने मंच से संबोधन के दौरान बिहार को केरल की तुलना में गरीब और पिछड़ा राज्य बताया. अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने कहा कि वह ऐसे राज्य से आते हैं जो देश के गरीब राज्यों में शामिल है, जबकि केरल को उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में बेहतर उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि बिहार में अक्सर केरल जैसे विकास मॉडल की बात की जाती है और केरल के लोगों पर उन्हें गर्व है.
क्यों हो रहा राजनीतिक विवाद
तेजस्वी के इस बयान पर National Democratic Alliance (एनडीए) के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उनका आरोप है कि विपक्ष के नेता दूसरे राज्यों में जाकर बिहार की छवि खराब कर रहे हैं. एनडीए नेताओं का कहना है कि चुनावी लाभ के लिए अपने ही राज्य को गरीब बताना उचित नहीं है और इससे राज्य की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है. कुछ नेताओं ने 1990 के दशक के शासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर की नीतियों के कारण बिहार की स्थिति कमजोर हुई, जिसे सुधारने में वर्षों लगे. उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राज्य में विकास की गति बढ़ी है और बाहरी लोग भी इसकी सराहना करते हैं.
क्या कहते हैं आंकड़े?
हालांकि आर्थिक आंकड़े इस बहस को एक अलग दिशा देते हैं. सरकारी आकंड़े के अनुसार 2015-16 में बिहार में गरीबी दर लगभग 51.91% थी, जो घटकर 2025 तक करीब 33.76% रहने का अनुमान है. पिछले एक दशक में लगभग 3.77 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं. 2025-26 में बिहार की जीडीपी वृद्धि दर 13–15% रहने का अनुमान है. इसके बावजूद प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो देश में प्रति व्यक्ति आय का अनुमानित आंकड़ा लगभग ₹2.5–2.85 लाख है वहीं बिहार में प्रति व्यक्ति आय का अनुमानित आंकड़ा ₹64,000–₹68,000 है.