Bihar Domicile Certificate : बिहार सरकार ने जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. नए नियमों के तहत अब आवेदन प्रक्रिया को अधिक सख्त और पारदर्शी बना दिया गया है. सरकार के अनुसार अब आवेदकों को आवेदन करते समय ही सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा. यदि कोई आवेदक जरूरी कागजात अपलोड नहीं करता है, तो उसका आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाएगा.
क्या बदला है नए नियम में?
नए प्रावधानों के मुताबिक अब केवल पहचान पत्र के आधार पर निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा. आवेदकों को अपने पते से संबंधित वैध दस्तावेज देने होंगे, जिनमें विशेष रूप से जमीन से जुड़े कागजात को प्राथमिकता दी गई है. अगर जमीन आवेदक के नाम पर नहीं है और परिवार के अन्य सदस्य (जैसे पिता या दादा) के नाम पर है, तो ऐसी स्थिति में आवेदक को वंशावली (फैमिली ट्री) प्रस्तुत करना होगा, जिससे संबंध स्पष्ट हो सके.
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
सरकार ने कई प्रकार के भूमि संबंधी दस्तावेजों को मान्य किया है, जैसे:
- खतियान
- दान पत्र
- राजस्व रिकॉर्ड
- भूमिहीनों को आवंटित जमीन के दस्तावेज
इन्हीं के आधार पर अब निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे. जिनके पास जमीन के कागजात नहीं हैं, उनके लिए क्या? तो ऐसे आवेदकों के लिए सरकार ने निरीक्षण (इंस्पेक्शन) का विकल्प रखा है. आवेदन के दौरान यह विकल्प चुनने पर राजस्व कर्मी मौके पर जाकर जांच करेंगे. यदि जांच में दी गई जानकारी सही पाई जाती है, तो प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा.
नए नियमों पर क्या है सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यह कदम फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाने और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है. लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाकर योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा है. हालांकि, इस फैसले को लेकर आम लोगों में चिंता भी देखने को मिल रही है. कई लोगों का कहना है कि इससे प्रक्रिया जटिल हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास जमीन से जुड़े कागजात नहीं हैं. कुछ लोगों ने यह आशंका भी जताई है कि निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार बढ़ सकता है और राजस्व कर्मियों द्वारा अनावश्यक पैसे की मांग की जा सकती है.