Samrat choudhary News : बिहार की सत्ता के गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल की हो रही है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने जिस बदलाव की शुरुआत की है, उसने बिहार की ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अब मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर कर दिया गया है. इस बदलाव को सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक तबादला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की सत्ता शैली और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बड़े परिवर्तन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
नीतीश कुमार की टीम अब CMO से बाहर
नीतीश कुमार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री सचिवालय की सबसे प्रभावशाली टीम में जिन अधिकारियों का नाम प्रमुखता से लिया जाता था, उनमें अनुपम कुमार, कुमार रवि और चंद्रशेखर सिंह शामिल थे. ये तीनों अधिकारी लंबे समय तक सरकार के अहम फैसलों, मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों और प्रशासनिक रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे. मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी मौजूदगी को सत्ता के प्रभाव का प्रतीक माना जाता था. लेकिन अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई प्रशासनिक व्यवस्था में इन अधिकारियों की भूमिका बदल गई है.
अनुपम कुमार दिल्ली भेजे गए
सबसे बड़ा बदलाव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुपम कुमार को लेकर हुआ है. मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले अनुपम कुमार को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली भेज दिया गया है. वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत रहे और बिहार प्रशासन के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में उनकी गिनती होती थी. नीतीश कुमार के साथ उनकी मजबूत प्रशासनिक समझ और तालमेल की चर्चा अक्सर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में होती रही थी. अब उनके दिल्ली जाने के बाद सत्ता के केंद्र में उनकी सीधी भूमिका समाप्त मानी जा रही है.
कुमार रवि को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
सीएमओ से हटाए गए दूसरे बड़े अधिकारी कुमार रवि हैं. संकट की परिस्थितियों में सरकार के भरोसेमंद अफसर के रूप में पहचाने जाने वाले कुमार रवि की मुख्यमंत्री कार्यालय में मजबूत पकड़ मानी जाती थी. अब उन्हें स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि यह विभाग महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मुख्यमंत्री सचिवालय की मुख्य निर्णय प्रक्रिया से दूरी के रूप में देख रहे हैं.
चंद्रशेखर सिंह की भी बदली भूमिका
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी चंद्रशेखर सिंह को भी मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर कर नई जिम्मेदारी दी गई है. प्रशासनिक फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर सिंह लंबे समय तक सरकार की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों का हिस्सा रहे थे. तीनों अधिकारियों का एक साथ CMO से बाहर होना बिहार प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
सम्राट चौधरी की नई प्रशासनिक टीम तैयार
इन बदलावों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई प्रशासनिक टीम में कौन अधिकारी सबसे प्रभावशाली होंगे. हालिया फेरबदल की सूची इस सवाल का जवाब भी देती नजर आ रही है. सरकार ने जिन दो अधिकारियों पर सबसे अधिक भरोसा जताया है, उनमें 2003 बैच के आईएएस अधिकारी लोकेश कुमार सिंह और 2007 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार सिंह प्रमुख हैं.
संजय कुमार सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी
संजय कुमार सिंह शुरुआत से ही सम्राट चौधरी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं. शपथ ग्रहण समारोह से लेकर महत्वपूर्ण सरकारी बैठकों तक उनकी मौजूदगी लगातार चर्चा में रही. अब उन्हें आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है. इसके साथ ही उन्हें वित्त विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. इसका सीधा अर्थ है कि सरकार की आर्थिक नीतियों और मुख्यमंत्री कार्यालय दोनों में उनकी प्रभावशाली भूमिका रहने वाली है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि संजय कुमार सिंह आने वाले समय में सरकार की प्रशासनिक रणनीति के प्रमुख चेहरे बन सकते हैं.
लोकेश कुमार सिंह को पर्यटन की अतिरिक्त जिम्मेदारी
दूसरी ओर लोकेश कुमार सिंह को भी मुख्यमंत्री कार्यालय में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. स्वास्थ्य विभाग में उनके कामकाज की चर्चा पहले से होती रही है. मुख्यमंत्री का सचिव बनाए जाने के बाद अब उन्हें पर्यटन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. माना जा रहा है कि बिहार की ब्रांडिंग, पर्यटन विकास और निवेश आकर्षित करने की रणनीति में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है.
क्या बदल रही है बिहार की सत्ता शैली?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल अधिकारियों के तबादले तक सीमित नहीं है. इसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा अपनी कार्यशैली के अनुसार प्रशासनिक ढांचे को पुनर्गठित करने की शुरुआत माना जा रहा है. नीतीश कुमार के दौर में जिन अधिकारियों का दबदबा मुख्यमंत्री कार्यालय में दिखाई देता था, अब उनकी जगह नए चेहरे सामने आ रहे हैं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार प्रशासनिक फैसलों और सत्ता संचालन की शैली में बदलाव चाहती है. बिहार की राजनीति में ब्यूरोक्रेसी हमेशा से बेहद प्रभावशाली रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ दिखाई देने वाले अधिकारियों का बदलना सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जाता है.