Bihar News : बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि जारी होने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य के 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि ट्रांसफर की. वहीं, इस भुगतान को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खाते में पहुंच जानी चाहिए. सरकार की ओर से इसे जरूरतमंदों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम बताया गया.
आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने पर विवाद
पेंशन भुगतान के लिए बिहार कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर कैबिनेट फैसले की प्रति साझा करते हुए आरोप लगाया कि बिहार की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो गई है. उन्होंने कहा कि आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल आमतौर पर प्राकृतिक आपदा, अचानक पैदा हुए संकट या अप्रत्याशित वित्तीय जरूरतों के लिए किया जाता है. ऐसे में नियमित सामाजिक सुरक्षा योजना के भुगतान के लिए इसका उपयोग कई सवाल खड़े करता है.
क्या बिहार वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है?
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या बिहार में वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति बन रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास नियमित बजटीय प्रावधान से पेंशन भुगतान करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं. उन्होंने दावा किया कि राज्य में कई ठेकेदारों का भुगतान लंबे समय से लंबित है और वर्ष 2023-24 में स्वीकृत कई योजनाओं का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है. इसके अलावा उन्होंने बिजली आपूर्ति, छात्रवृत्ति भुगतान में देरी और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभावित होने जैसे मुद्दे भी उठाए. तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि फंड की कमी के कारण बिहार राज्य फसल सहायता योजना को बंद करने का फैसला लिया गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की आर्थिक स्थिति पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की.
क्या होता है कॉन्टिजेंसी फंड
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को राशि जारी किए जाने के बाद अब यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बहस का केंद्र बन गया है. सरकार जहां इसे जनकल्याणकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राज्य की वित्तीय स्थिति से जोड़कर सवाल उठा रहा है. लेकिन इसके साथ साथ सवाल ये भी है कि ये कॉन्टिजेंसी फंड क्या है, क्या इससे पैसा लेना वित्तीय संकट का संकेत है? आसान भाषा में कहे तो कॉन्टिजेंसी फंड (Contingency Fund) सरकार का एक ऐसा आपात कोष होता है, जिसका इस्तेमाल अचानक आने वाले और अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है. सरकार जब किसी ऐसी स्थिति का सामना करती है, जिसके लिए बजट में पहले से पैसे की व्यवस्था नहीं की गई होती, तब सरकार इस निधि से तुरंत धन ले सकती है. आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India) का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 267(1) में किया गया है.यह राष्ट्रपति के नियंत्रण में रहती है.
राज्यों में आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल कब होता है?
राज्य सरकार इसका उपयोग प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप, सूखा, चक्रवात, महामारी या किसी अन्य आपात स्थिति में कर सकती है. इसके अलावा ऐसी जरूरी सरकारी व्यवस्था के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां तुरंत पैसे की जरूरत हो. भारत के संविधान के अनुच्छेद 267(2) में राज्यों के लिए आकस्मिकता निधि का प्रावधान किया गया है. यह निधि राज्यपाल के नियंत्रण में रहती है और जब राज्य सरकार को अचानक खर्च करना पड़ता है, तो राज्यपाल की अनुमति से आकस्मिकता निधि से पैसा उपलब्ध कराया जाता है. इसके बाद सरकार को इस खर्च के लिए राज्य विधानसभा से मंजूरी लेनी होती है. मंजूरी मिलने के बाद यह राशि वापस आकस्मिकता निधि में जमा कर दी जाती है.