2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के तब के Prime Minister पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का दरभंगा के राज मैदान में चुनावी सभा होनी थी। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के बहाने और अपनी महत्वाकांक्षा के आगे विवश होकर नीतीश कुमार पलट चुके थे। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी राज मैदान से घोषणा कि की सरकार बनते ही ना सिर्फ बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा बल्कि दरभंगा को संस्कृतिक राजधानी का दर्जा दिया जाएगा। ये बात और है कि दरभंगा पहले से सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित थी। लेकिन आजादी के बाद से एक तरफ जहां बिहार को ओछेपन का शिकार होना पड़ा उसी तरह बिहार का यह जिला और तिरहुत क्षेत्र (बिहार जब बंगाल से अलग हुआ तो मुजफ्फरपुर और दरभंगा नामक दो जिला बना,इन्हीं जिलों को तिरहुत नाम से व्यक्त किया जाता है) के इस केंद्र की उपेक्षा होती रही। खैर सरकार बनी नरेंद्र मोदी Prime Minister तो बने लेकिन ना तो विशेष राज्य का दर्जा मिला और ना ही संस्कृतिक राजधानी विकसित हुई।
मैं भी चौकीदार से मोदी का परिवार, तक कितना कुछ बदला
दिन बीतता चला गया और आम चुनाव 2019 के तारीखों का ऐलान हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से Prime Minister बनने के लिए दरभंगा आए। लेकिन इस बार नई घोषणाओं के साथ साथ आरजेडी के जंगल राज्य और 2017 के बाद नीतीश कुमार की सुशासन के चश्मदीद होने का सबूत पेश किया। पिछले कार्यकाल के अधूरे वादों को पूरा करने की कसम खाई। 2015-16 के बजट में प्रस्तावित एम्स जो उस समय भी सिर्फ कागजों में बन रही थी उसके निर्माण का एक और उम्मीद लोगों को दिया लेकिन पीएम के उस रैली में एक बार भी दरभंगा एम्स का जिक्र नहीं हुआ।
भाषण में इन बातों पर जोर
लेकिन पलटती सरकार और बदलती जगह के बीच दरभंगा का एम्स चुनावी भाषण और शायद सरकारी कागजों तक ही समिति रह गई। लोगों को घर में रोजगार कैसे मिलेगा? लोगों की आर्थिक स्थिति कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था में कैसे सुधार होगा इन मुद्दों के बदले आज का परिवार और उस समय का चौकीदार दरभंगा के लोगों को आतंकबाद, परिवारवाद, जंगलराज, जात पात आदि वो किस्से सुना रहा था। जिस का गवाह दरभंगा समेत पूरे राज्य का एक एक नागरिक है। लगभग 45 मिनट के उस भाषण में प्रधानमंत्री ने जिस चौकीदार की बात की थी। पिछले पाँच साल और फिर उसके अगले पाँच सालों में इस इलाके के लिए उनके विचारों का भेद खुलता गया। लेकिन सिवाय कुछ जुमलें और कुछ अधूरी योजनाओं के अलावा इस इलाके के लोगों को कुछ नहीं मिला।
Prime Minister ने क्षेत्रवासियों को अपना प्रणाम भेजा
अब बात करते हैं 2024 के लोकसभा चुनाव की। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पिछले कुछ दिनों में पांचवीं बार बिहार पहुंचे नरेंद्र मोदी ने आज दरभंगा में सातवी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने करीब 26 मिनट भाषण दिया। इन 26 मिनट में पीएम कांग्रेस, आरजेडी, आरक्षण, पलायन, आदि की खूब बात की और विपक्ष को जिम्मेदार भी बताया लेकिन यह नहीं बताया की 10 सालों में इस इलाके के लोगों की बुनियादी समस्याओं का निदान क्यों नहीं हुआ ? राज्य और केंद्र में गठबंधन की सरकार होने के बावजूद एम्स क्यों नहीं बना ? कोरोना महामारी में लोगों को पलायन क्यों करना पड़ा? ये मुद्दे सरकार के चुनावी मुद्दे नहीं है बल्कि बिहार में बीजेपी के लिए मुद्दों में, आज भी जंगलराज, भ्रष्टाचार, घोटाला, परिवारवाद ही हैं। हेल्थ, शिक्षा, रोजगार, उद्योग, आदि के नाम पर पिछले 30 सालों से राज्य को मिल रही जुमले का निवारण कब किया जाएगा ? इसके लिए सरकार का क्या प्लान है? इन सभी सभी सवालों के जवाब के बदले उन्होंने क्षेत्रवासियों को अपना प्रणाम भेजा है।
मिथिलांचल में लोकसभा की 7 लोकसभा सीटों पर एनडीए का कब्जा
दरभंगा में लोकसभा चुनाव के लिए 7 वें चरण में मतदान होना है, लेकिन जानकार बताते है कि दरभंगा सिर्फ दरभंगा लोकसभा के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। बल्कि यह अपने आस पड़ोस के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं। बिहार के 40 सीटों में मिथिलांचल इलाके से 7 लोकसभा सीट हैं, जिन पर बीजेपी का कब्जा है। इन सीटों पर तीसरे, चौथे और पांचवे चरण में मतदान होना है। तीसरे फेज में सात मई को सुपौल, मधेपुरा और झंझारपुर में चुनाव है जबकि चौथे फेज में 13 मई को दरभंगा,समस्तीपुर और उजियारपुर में चुनाव है। और सीतामढ़ी में पांचवे फेज में 20 मई को मतदान होगा। पीएम ने आज दरभंगा की रैली के जरिए दरभंगा, समस्तीपुर, उजियारपुर, मधुबनी और झंझारपुर के वोटरों को साधने की कोशिश कर रहे थे।
दरभंगा लोकसभा सीट से बीजेपी का खाता 1999 में खुला
मिथिलांचल का केंद्र दरभंगा को माना जाता है। इसलिए राजनीति के अलावा अन्य चीजों को लेकर भी इसके आस पड़ोस से ज्यादा इस पर नजर रहती है। लोकसभा की बात करें तो दरभंगा निर्वाचन क्षेत्र से पिछले 20 सालों से यह बीजेपी का गढ़ है। पहली बार इस लोकसभा सीट से बीजेपी का खाता 1999 में खुला था। उस वक्त कीर्ति आजाद पहली बार भाजपा से सांसद बने थे। जिसके बाद फिर 2009 पार्टी को यहाँ जीत मिली जिसके बाद से लगातार पार्टी यहाँ से जीतती रही। इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत राज्य के कुल छह विधानसभा आते हैं। इन विधानसभा सीटों में दरभंगा शहरी, दरभंगा ग्रामीण, बेनीपुर, अलीनगर, गौराबौराम और बहादुरपुर शामिल हैं। इन सभी सीटों में दरभंगा ग्रामीण सीट को छोड़कर सभी सीटों पर NDA गठबंधन के उम्मीदवार है। दरभंगा ग्रामीण सीट से मौजूदा प्रत्याशी ललित यादव विधायक हैं।
16 लाख से अधिक मतदाता है दरभंगा में
बागमती नदी के किनारे बसा दरभंगा राज्य का एक प्रमुख जिला होने के साथ साथ प्रमंडलीय मुख्यालय भी है। जिसकी जनसंख्या की बात करें तो प्रति हजार में 910 लिंगानुपात वाले इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 39 लाख 21 हजार 971 है। जबकि मतदाताओं की संख्या 16 लाख 20 हजार 514 है। दरभंगा की साक्षरता दर 44.32 फीसद है। क्षेत्र की जनसंख्या घनत्व 1721 प्रतिवर्ग किमी है।