Chhath Mahaparva: खरना पूजा के बाद 36 घंटे के निर्जला उपवास, जानिए क्या है Kharna का महत्व

पटना। आज, 6 नवंबर 2024 को चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा का दूसरा दिन है, जिसे Kharna के रूप में मनाया जाता है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाने वाला खरना पर्व छठ पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस दिन व्रतधारी विशेष संकल्प के साथ संध्या समय सूर्य देवता को प्रसाद अर्पित कर पूजा करते हैं, जो दिन का सबसे शुभ क्षण माना जाता है. इस वर्ष का खरना पर्व सर्वार्थ सिद्धि और सुकर्मा योग में मनाया जा रहा है, जिससे इसकी पवित्रता और अधिक बढ़ गई है.

Kharna की पारंपरिक पूजा विधि

Kharna के दिन व्रतधारी सुबह से निर्जला उपवास रखते हैं और संध्या समय विशेष प्रसाद तैयार करते हैं. प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे का उपयोग किया जाता है और आम की लकड़ी से आग जलाई जाती है, जिससे वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है. प्रसाद के रूप में गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है, जिसे गेहूं के आटे की रोटी के साथ मिलाकर भगवान सूर्य और छठी मैया को अर्पित किया जाता है. इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रतधारी 36 घंटे के निर्जला उपवास का संकल्प लेते हैं, जो छठ पूजा की पवित्रता को दर्शाता है.

खरना प्रसाद की विशेषता

खरना के प्रसाद में गुड़ और चावल से बनी खीर, मिट्टी के चूल्हे पर पकाई जाती है. यह परंपरागत विधि छठ पूजा की शुद्धता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. खीर के साथ गेहूं के आटे से बनी रोटी भी प्रसाद में शामिल होती है, जिसे व्रतधारियों द्वारा सूर्य देव को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण किया जाता है.

 खरना पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष पटना में सूर्यास्त का समय शाम 5:05 बजे है, जबकि Kharna पूजा का शुभ मुहूर्त 5:29 बजे से 7:48 बजे तक रहेगा. इस अवधि के बीच व्रतधारी अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करेंगे. ज्योतिषीय दृष्टि से सर्वार्थ सिद्धि और सुकर्मा योग के संयोग से इस वर्ष का खरना पर्व विशेष रूप से पावन माना जा रहा है.

खरना पूजा के बाद व्रतधारियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है, जो उनके दृढ़ संकल्प और आस्था का प्रतीक है. इस पर्व से व्रतधारियों को मानसिक शांति, शुद्धता और ऊर्जा का आभास होता है, जो छठ पूजा के महत्व को और भी बढ़ाता है.

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