लोकगायिका शारदा सिन्हा का Multiple Myeloma से निधन: जानिए कितना खतरनाक है यह ब्लड कैंसर

पटना। प्रसिद्ध लोकगायिका शारदा सिन्हा का 5 नवंबर को निधन हो गया है. छठ पूजा के गीतों से लोकप्रिय शारदा सिन्हा पिछले छह वर्षों से मल्टीपल मायलोमा(Multiple Myeloma) नामक घातक ब्लड कैंसर से पीड़ित थीं. इस बीमारी के कारण शरीर में असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं बढ़ जाती हैं, जो रक्त, हड्डियों और अन्य अंगों को प्रभावित करती हैं.

क्या है Multiple Myeloma ?

Multiple Myeloma एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जिसमें मरीज आमतौर पर कमर दर्द या पीठ दर्द की समस्या के साथ डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. इसके अलावा कुछ लोग गुर्दे की विफलता या चेस्ट इन्फेक्शन की स्थिति में भी इस कैंसर का निदान पाते हैं. यह बीमारी उम्र और कैंसर की अवस्था पर निर्भर करती है, जो इसे और भी खतरनाक बना देती है.

मल्टीपल मायलोमा का सर्वाइवल रेट और रिसर्च

रिसर्च के अनुसार Multiple Myeloma से प्रभावित लगभग 85 फीसदी मरीज एक साल तक जीवित रह पाते हैं, जबकि 55 फीसदी मरीज पांच साल या उससे अधिक समय तक जी पाते हैं. शुरुआती निदान और सही इलाज मिलने पर कुछ मरीज 10 साल तक भी जीवित रहते हैं, लेकिन यह संख्या कम ही होती है. मरीज की उम्र और कैंसर की अवस्था पर निर्भर करता है कि वह इस बीमारी से कितने समय तक लड़ पाते हैं.

लोकसंगीत में शारदा सिन्हा का योगदान

शारदा सिन्हा के निधन से भोजपुरी लोक संगीत को अपूरणीय क्षति हुई है. ‘बिहार कोकिला’ के नाम से प्रसिद्ध, शारदा ने अपने छठ गीतों से पूरे देश में अपनी खास पहचान बनाई. उनका जाना न केवल संगीत प्रेमियों के लिए बल्कि लोक संस्कृति के लिए भी एक बड़ी हानि है.

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