लोकगायिका Sharda Sinha का निधन, 72 की उम्र में दिल्ली के एम्स में ली आखिरी सांस 

पटना। दिल्ली के एम्स अस्पताल में सोमवार को प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायिका Sharda Sinha का निधन हो गया. ‘बिहार कोकिला’ के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा का जाना उनके प्रशंसकों और भोजपुरी संगीत प्रेमियों के लिए एक गहरी क्षति है. अपनी मधुर आवाज और छठ के गीतों से सबका दिल जीतने वाली शारदा अब हमेशा के लिए चुप हो गई हैं. हालांकि, उनके गाए हुए गीतों के जरिए उनकी आवाज हमेशा फैंस के दिलों में जीवित रहेगी.

छठ के पर्व पर रिलीज हुआ अंतिम गीत

भोजपुरी लोकगायिका शारदा सिन्हा का आखिरी छठ गीत, ‘दुखवा मिटाईं छठी मइया,’ छठ पर्व से ठीक पहले रिलीज किया गया, जिससे उनके चाहने वालों में गहरी भावनाएँ उमड़ आई हैं. इस गीत की रिकॉर्डिंग पहले ही पूरी कर ली गई थी, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी उनके नए गीत को छठ के मौके पर ही रिलीज किया गया. यह गीत उनकी मधुर आवाज का अंतिम उपहार बनकर श्रोताओं तक पहुँचा है.

सुप्रसिद्ध लोकगायिका ने अपने संगीत से लोकसंस्कृति में एक विशेष स्थान हासिल किया था, खासकर छठ गीतों के जरिए, जो हर साल उनके चाहने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय होते थे. शारदा सिन्हा का छठ गीत छठ पूजा का पर्याय बन गया था और उनके बिना यह पर्व अधूरा सा लगता था. उनका निधन छठ के पहले ही दिन हुआ, जिससे उनकी अनुपस्थिति को लेकर भोजपुरी संगीत प्रेमियों के बीच गहरा शोक है.

‘दुखवा मिटाईं छठी मइया’ उनके चाहने वालों के लिए उनकी स्मृतियों का हिस्सा बनकर रहेगा. उनका यह अंतिम गीत उनके लोकसंगीत के प्रति समर्पण और छठ पर्व से उनकी गहरी निष्ठा का प्रमाण है, जो उन्हें हमेशा फैंस के दिलों में जीवित रखेगा.

सिंगर के बेटे ने दी थी स्वास्थ्य की जानकारी

शारदा सिन्हा के बेटे, अंशुमन सिन्हा ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी तबीयत को लेकर अपडेट साझा किया था. उन्होंने बताया था कि उनकी मां की हालत गंभीर है और डॉक्टर पूरी कोशिश कर रहे हैं. अंशुमन ने भावुक होते हुए कहा कि शारदा सिन्हा वेंटिलेटर पर थीं और परिवार उनके लिए प्रार्थना कर रहा था. अक्तूबर के अंत में उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था और सोमवार को उनकी हालत बिगड़ने की सूचना मिली थी.

लंबे समय से कैंसर से जूझ रहीं थीं Sharda Sinha

Sharda Sinha पिछले कुछ वर्षों से मल्टिपल मायलोमा, एक प्रकार के ब्लड कैंसर, से पीड़ित थीं. 2018 में उनके कैंसर का पता चला था और तब से उनका इलाज जारी था. उनके स्वास्थ्य में गिरावट का एक अन्य कारण उनके पति ब्रज किशोर का हाल ही में हुआ निधन भी था. सितंबर में उनके पति का ब्रेन हैमरेज से देहांत हो गया था, जिसके बाद से शारदा सिन्हा शोक में थीं और उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी.

‘बिहार कोकिला’ के नाम से मशहूर थीं Sharda Sinha

Sharda Sinha का जन्म 1 अक्तूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले में हुआ था. उन्होंने अपने करियर में ज्यादातर गीत मैथिली और भोजपुरी में गाए. छठ पूजा के लिए उनके गीत बेहद लोकप्रिय हुए और उनके बगैर छठ का त्योहार अधूरा माना जाता है. अपने योगदान के लिए उन्हें 1991 में पद्म श्री और 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

लोक संगीत में उनकी कमी को नहीं भरा जा सकेगा

Sharda Sinha का जाना भोजपुरी लोक संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उनकी आवाज और उनके गाए गीत हमेशा संगीत प्रेमियों की यादों में जीवित रहेंगे. उनका निधन छठ के त्योहार से कुछ दिन पहले हुआ, जिससे उनके चाहनेवालों के बीच गहरा शोक का माहौल है.

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