नई दिल्ली। 5 फरवरी को दिल्ली के नागरिक राष्ट्रीय राजधानी की आठवीं विधानसभा (Delhi Assembly elections)के लिए मतदान करेंगे. पिछली दो चुनावों 2020 और 2015 में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारी जीत हासिल की थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ था.
शुरुआती चुनाव और दिल्ली का विशेष दर्जा
1952 में पहला विधानसभा चुनाव स्वतंत्रता के बाद आयोजित किया गया था. 48 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने 39 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया और चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने.
लेकिन 1956 में दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया, और विधानसभा को समाप्त कर दिया गया. अगले 37 वर्षों तक (1956-1993) दिल्ली में कोई विधानसभा या मुख्यमंत्री नहीं था. 1966 में एक 61 सदस्यीय मेट्रोपॉलिटन काउंसिल का गठन किया गया, जिसमें 56 सदस्य निर्वाचित और 5 मनोनीत थे. यह काउंसिल केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए बनाई गई थी और इसके पास कोई विधायी अधिकार नहीं थे.1991 में संसद ने दिल्ली के लिए फिर से विधानसभा के गठन को मंजूरी दी.
Delhi Assembly elections : पहला विधानसभा और बीजेपी का उदय
1993 के पहले विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly elections)में बीजेपी ने 49 सीटें और 42.8% वोट शेयर के साथ सरकार बनाई. मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस ने 14 सीटें और 34.5% वोट हासिल किए. लेकिन बीजेपी सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों और महंगाई के कारण संकट में आ गई. 1998 के चुनाव से पहले सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया गया.
Delhi Assembly elections : कांग्रेस का स्वर्ण युग
1998 में कांग्रेस ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की. शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं और अगले 15 वर्षों तक दिल्ली की राजनीति पर उनका दबदबा रहा.
- 1998: कांग्रेस ने 47.75% वोट शेयर और 52 सीटें जीतीं.
- 2003: कांग्रेस ने 48.1% वोट शेयर के साथ 47 सीटें जीतीं.
- 2008: कांग्रेस ने 40.3% वोट शेयर के साथ 43 सीटें जीतीं.
जनता को पसंद आया तीसरा बिकल्प
2013 के चुनाव (Delhi Assembly elections) में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP एक नई राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी और फिर भाजपा और कांग्रेस वापसी को जनता ने नाकार दिया.
- 2013: AAP ने 28 सीटें जीतीं, लेकिन सरकार केवल 40 दिनों तक चली.
- 2015: AAP ने 70 में से 67 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.
- 2020: AAP ने 62 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 8 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस का वोट शेयर 10% से भी कम रहा.