नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज हारने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम(Team India) के प्रदर्शन और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं. अपने घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड से 0-3 की करारी हार का सामना करने वाली टीम इंडिया ने पिछले आठ टेस्ट मैचों में से छह में शिकस्त झेली. जिसके बाद अब टीम के बल्लेबाजी और गेंदबाजी प्रदर्शन को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है.
Team India के बल्लेबाजी पर सवालिया निशान
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारतीय बल्लेबाजों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. खराब फॉर्म से जूझ रहे रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट करियर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर चयन समिति इन दोनों को टीम(Team India) से बाहर करने का फैसला करती है या वे संन्यास लेते हैं, तो इनके स्थान पर दावेदारी करने वाले बल्लेबाज तैयार हैं.
तमिलनाडु के साई सुदर्शन प्रमुख दावेदार हो सकते हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ भारत-ए के लिए खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया है, हालांकि वे फिलहाल स्पोर्ट्स हर्निया के ऑपरेशन के बाद रिहैबिलिटेशन में हैं. बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल और अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन भी संभावित विकल्प हैं. तो चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़, रजत पाटीदार और श्रेयस अय्यर भी मजबूत दावेदार हैं. हालांकि, श्रेयस को शॉर्ट गेंदों के खिलाफ कमजोर माना जाता है, जबकि पाटीदार घरेलू सीरीज में इंग्लैंड के खिलाफ अपने मौके का फायदा नहीं उठा सके.
Team India में गेंदबाजी का संकट ?
भारतीय तेज गेंदबाजी इकाई बदलाव के दौर से गुजर रही है. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा जैसे गेंदबाजों की जगह लेने के लिए नए विकल्प तैयार करने में समय लग सकता है. बुमराह को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दूसरे छोर से समर्थन नहीं मिला, जिससे उनका वर्कलोड बढ़ गया. मोहम्मद सिराज 36 टेस्ट खेलने के बावजूद मैच विजेता साबित नहीं हो सके हैं. प्रसिद्ध कृष्णा लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करने में नाकाम रहे हैं. घरेलू सर्किट में भी बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों की कमी साफ दिखाई देती है. अर्शदीप सिंह, यश दयाल और खलील अहमद ने टेस्ट क्रिकेट में प्रभाव नहीं डाला है.
फैसले का सही समय
भारतीय टीम (Team India) को अपना अगला टेस्ट मैच जून में इंग्लैंड में खेलना है. फरवरी में घरेलू सीजन खत्म होने के बाद या इंग्लैंड दौरे से पहले चयन समिति को बड़े फैसले लेने होंगे. भारतीय क्रिकेट टीम के लिए यह समय आत्ममंथन और सुधार का है. बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में स्थिरता और गुणवत्ता लाने के लिए चयनकर्ताओं को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है. टीम के पास कुछ संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके से परखा और मौका दिया जाना चाहिए.