बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को लेकर क्यों हो रहा विवाद ?

नई दिल्ली। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE Prelims) हाल ही में विवादों के केंद्र में रही है. दिसंबर में आयोजित इस परीक्षा के दौरान पटना के एक परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र लीक होने की खबरों ने हंगामा मचा दिया. इसके बाद कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन और धरने जारी रहे.

परीक्षा का उद्देश्य

BPSC परीक्षा का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है. इस परीक्षा के जरिए बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS), बिहार पुलिस सेवा (BPS), बिहार वित्त सेवा, और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में पदों पर भर्ती की जाती है.BPSC परीक्षा तीन चरणों में होती है

  • प्रारंभिक परीक्षा
  • मुख्य परीक्षा (मेंस)
  • साक्षात्कार (इंटरव्यू)

इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है.

पद और सैलरी का विवरण

इस बार परीक्षा के माध्यम से कुल 1957 पदों पर भर्ती की जाएगी. चयनित उम्मीदवारों को बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में लेवल 6 से लेवल 9 तक के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी. इसके अनुसार, सैलरी संरचना भी भिन्न होती है.

  • डीएसपी (DSP): ₹56,100 से ₹1,77,500 प्रति माह
  • बीडीओ (BDO – प्रखंड विकास पदाधिकारी): ₹53,100 से ₹1,67,800 प्रति माह
  • जिला कल्याण अधिकारी (District Welfare Officer): ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रति माह
  • एलडीसी (LDC): ₹19,900 से ₹63,300 प्रति माह

क्या है BPSC विवाद

परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र लीक होने की खबरों ने BPSC की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई अभ्यर्थियों और संगठनों ने निष्पक्ष जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग की है.

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