हिरासत में प्रशांत किशोर, क्या सच में पुलिस ने मारी थप्पड़ ?

पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर(Prashant Kishore) को सोमवार सुबह पटना पुलिस ने गांधी मैदान से  हिरासत में ले लिया. किशोर 2 जनवरी से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित 70वीं संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के चलते उसकी रद्दीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे.

सुबह 4 बजे  हुई कारवाई

सुबह लगभग 4 बजे पुलिस ने गांधी मैदान में पहुंचकर 10 पुलिस थानों के कर्मियों के साथ कार्रवाई की. किशोर, जो BPSC उम्मीदवारों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हें उनके समर्थकों के विरोध के बावजूद एक एम्बुलेंस में ले जाया गया.

जन सुराज पार्टी ने अपनी आधिकारिक X हैंडल पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार की पुलिस ने प्रशांत किशोर को, जो पिछले 5 दिनों से शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली के खिलाफ भूख हड़ताल पर थे, सुबह 4 बजे गिरफ्तार कर लिया. उनके साथ बैठकर हजारों युवा भी अज्ञात स्थानों पर ले जाए गए.

हिरासत में ले अज्ञात स्थान पर ले गयी पुलिस

इस दौरान एक वीडियो भी सामने आया जिसमें पुलिसकर्मियों को किशोर के साथ झगड़ा करते हुए देखा गया. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रशांत किशोर(Prashant Kishore) छात्रों के लिए आवाज उठा रहे थे, और इस तरह जो उनके साथ बर्ताव किया गया यह अस्वीकार्य है.

DM ने की Prashant Kishore की गिरफ्तारी की पुष्टि

पटना के जिला मजिस्ट्रेट (DM) चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि किशोर और उनके समर्थक गांधी मैदान में धरना दे रहे थे उन्हे सोमवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया. अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि उनका धरना गैरकानूनी था और वे महात्मा गांधी की मूर्ति के पास प्रतिबंधित स्थल पर प्रदर्शन कर रहे थे.

Prashant Kishore का इलाज से इंकार

पटना पुलिस ने किशोर के खिलाफ गांधी मैदान पर अनशन करने के आरोप में एक मामला दर्ज किया था. सूत्रों के अनुसार, किशोर को AIIMS पटना ले जाया गया, लेकिन उन्होंने इलाज से इंकार कर दिया. किशोर ने कहा कि मैं तब तक अपनी भूख हड़ताल नहीं तोड़ूंगा जब तक बिहार सरकार BPSC परीक्षा को रद्द नहीं करती.

जन सुराज पार्टी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे सरकार की कायरता बताया. साथ ही किशोर के साथ प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों को भी dispers किया गया और उन्हें अनजाने स्थानों पर ले जाया गया.

13 दिसंबर को आयोजित BPSC परीक्षा पर व्यापक आलोचना हो रही है, जिसमें पेपर लीक के आरोप लगाए गए हैं.

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