नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni)ने एक नया अध्याय शुरू किया. उन्होंने किन्नर अखाड़ा में महामंडलेश्वर का पद स्वीकार किया. शुक्रवार को संगम तट पर पिंडदान करने के बाद, ममता ने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से आशीर्वाद प्राप्त किया. अब वह यामाई ममता नंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी.
महाकुंभ में पहुंची साध्वी Mamta Kulkarni
53 वर्षीय ममता (Mamta Kulkarni) सुबह ही महाकुंभ के आयोजन स्थल पर पहुंची थीं. उन्होंने भगवा वस्त्र धारण किए थे और गले में रुद्राक्ष की माला पहन रखी थी. कंधे पर भगवा झोला लिए साध्वी के रूप में उनका नया स्वरूप देखने लायक था.
महामंडलेश्वर पद पर चर्चा और स्वीकृति
ममता (Mamta Kulkarni) और लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के बीच करीब एक घंटे तक महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई. इसके बाद किन्नर अखाड़े ने उन्हें औपचारिक रूप से महामंडलेश्वर घोषित किया. त्रिपाठी उन्हें लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी से भी मिलीं. वहां पर इस फैसले पर मुहर लगाई गई.
Mamta Kulkarni का नया सफर
ममता (Mamta Kulkarni) को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. लोग उनके साथ सेल्फी और फोटो लेने के लिए उत्सुक नजर आए. इस मौके पर ममता ने कहा कि महाकुंभ में आना और यहां की भव्यता देखना मेरे लिए एक यादगार पल है. यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इस पवित्र अवसर का हिस्सा बन रही हूं और संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर रही हूं. महाकुंभ के दौरान ममता का यह कदम उनके जीवन का एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. किन्नर अखाड़ा द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर का दर्जा दिया जाना इस संस्था के बढ़ते प्रभाव और समाज में बदलाव का प्रतीक है.