पटना। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 31 जनवरी को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 (Economic Survey) पेश किया. सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान है. साथ ही, अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच रिटेल महंगाई दर 4.9% रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है.
वृत मंत्री ने Economic Survey में क्या पेश किया
- GDP वृद्धि का अनुमान
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अगले दो दशकों तक 8% की दर से आर्थिक विकास बनाए रखने की आवश्यकता होगी. FY26 में GDP ग्रोथ 6.3% से 6.8% रहने की संभावना है.
- महंगाई दर में गिरावट
2023-24 में रिटेल महंगाई 5.4% थी, जो अप्रैल-दिसंबर 2024 में घटकर 4.9% हो गई. खराब मौसम और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में अस्थायी वृद्धि देखी गई.
- रोजगार में सुधार
FY24 में बेरोजगारी दर 3.2% रही, जो सात वर्षों में सबसे कम है. संगठित क्षेत्र में रोजगार के संकेत के रूप में EPFO में नेट पेरोल छह वर्षों में दोगुना हो गया है.
- AI के प्रभाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक श्रम बाजार में नए अवसरों का सृजन कर रहा है, लेकिन इससे संबंधित चुनौतियों को भी हल करने की आवश्यकता है.
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत
भारत को अगले 20 वर्षों में तेजी से वृद्धि के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा. सरकार ने पिछले पांच वर्षों में भौतिक, डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया है.
- बाजार का प्रभाव
सर्वेक्षण में अमेरिकी बाजार में करेक्शन (गिरावट) की संभावना जताई गई है, जिससे भारतीय शेयर बाजार और खुदरा निवेशकों पर असर पड़ सकता है.
महंगाई दर चार महीने के निचले स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण दिसंबर 2024 में महंगाई दर 5.22% रही, जो चार महीने का निचला स्तर है. नवंबर में यह 5.48% और अगस्त में 3.65% थी. खाद्य महंगाई दर घटकर 8.39% हो गई, जबकि ग्रामीण और शहरी महंगाई में भी गिरावट दर्ज की गई.
क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) देश की अर्थव्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है. यह बीते वर्ष के आर्थिक प्रदर्शन की समीक्षा करता है और भविष्य के लिए चुनौतियों एवं नीतिगत सुझावों का उल्लेख करता है. इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है और यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया जाता है.
पहला आर्थिक सर्वेक्षण और इसकी अहमियत
भारत का पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में केंद्रीय बजट का हिस्सा था. लेकिन 1964 से इसे बजट से अलग कर एक दिन पहले जारी किया जाने लगा. हालांकि, सरकार इसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं है, लेकिन यह नीतिगत निर्णयों और आर्थिक दिशा-निर्देशों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है.
इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) स्थिर आर्थिक विकास, महंगाई में गिरावट, रोजगार में सुधार और बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करता है. हालांकि, अमेरिकी बाजार में उतार-चढ़ाव और AI से जुड़ी चुनौतियां भारत की आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी.