नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025(Delhi assembly election) में इस बार चुनावी माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को सत्ता में आए 10 साल हो चुके हैं, और अब उसे एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा है. भ्रष्टाचार के आरोप, विधायकों का पार्टी छोड़ना और मुफ्त योजनाओं पर संदेह जैसी समस्याएं आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति में बदलाव कर संगठन-प्रकोष्ठ पर ध्यान दिया है और हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाई है.
राजनीतिक विश्लेषकों, पत्रकारों और आम लोगों से बातचीत के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है कि AAP को इस बार पिछले चुनावों जैसी बड़ी जीत मिलना मुश्किल है. 2020 के मुकाबले इस बार बीजेपी को बढ़त मिल सकती है.
Delhi assembly election : AAP को क्यों हो सकता है नुकसान?
एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर: 10 साल सत्ता में रहने के बाद AAP को इस बार एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा है.
भ्रष्टाचार के आरोप: शराब नीति घोटाला, शीश महल विवाद और चुनाव से पहले 8 विधायकों के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है.
मुफ्त योजनाओं पर सवाल: बीजेपी ने यह नैरेटिव बनाया है कि दिल्ली सरकार आर्थिक रूप से कमजोर हो गई है और इसकी योजनाएं अधिक समय तक नहीं चल सकतीं.
BJP की रणनीति: बीजेपी ने सांप्रदायिक मुद्दों के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया है. पार्टी के वोट शेयर में बढ़ोतरी हो सकती है.
कांग्रेस की वापसी की कोशिश: कांग्रेस भले ही ज्यादा सीटें न जीत पाए, लेकिन वह AAP के वोट काट सकती है. इससे बीजेपी को फायदा होगा.
Delhi assembly election : सीटों का अनुमानित गणित
विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार दिल्ली में AAP को 43-47 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि बीजेपी 23-27 सीटें जीत सकती है. कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ सकता है, लेकिन सीट जीतना मुश्किल नजर आ रहा है. 2020 में बीजेपी को 8 सीटें और AAP को 62 सीटें मिली थीं. इस बार AAP को 10 से 15 सीटों का नुकसान हो सकता है.
वोट बैंक की भूमिका
दिल्ली की राजनीति में विभिन्न समुदायों का वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
मुस्लिम वोटर्स (12.9%) – नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, चांदनी चौक और नई दिल्ली की सीटों पर इनका प्रभाव है.
जाट और गुर्जर वोटर्स (17-20%) – दिल्ली की 50 विधानसभा सीटों पर इनका असर पड़ता है.
पूर्वांचली वोटर्स (25%) – बुराड़ी, बादली, संगम विहार, पालम, करावल नगर और पटपड़गंज जैसी सीटों पर प्रभावशाली हैं.
दलित वोटर्स (18%) – किसी भी पार्टी को जीतने के लिए इस समुदाय को साधना जरूरी है.
BJP मजबूत AAP की घट सकती हैं सीटें
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी के लिए राह आसान नहीं होगी. भ्रष्टाचार के आरोपों, एंटी-इनकम्बेंसी और बीजेपी की मजबूत रणनीति के चलते इस बार AAP को सीटों का नुकसान हो सकता है. बीजेपी का वोट शेयर बढ़ रहा है, जिससे उसे फायदा मिलने की संभावना है. कांग्रेस भी AAP के वोट काटकर बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 5 फरवरी को दिल्ली की जनता किसे सत्ता की कुर्सी सौंपती है.दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीटों पर 5 फरवरी को एक चरण में मतदान होगा.