global economy : ट्रंप की नीतियों से मुश्किल में भारत, अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी छाए संकट के बादल

US India trade : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर व्यापार शुल्क (टैरिफ) और भारत को लेकर तीखा रुख अपनाया है. उन्होंने भारत को उन देशों के साथ रखा, जिनका अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) काफी अधिक है, और घोषणा की कि 2 अप्रैल से अमेरिका पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariffs) लागू करेगा. हालांकि इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) ने इस कदम को विश्व अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी बताया है और चेतावनी दी है कि इससे दुनिया 1930 के दशक की तरह महामंदी (Great Depression) की चपेट में आ सकती है.

US India trade : भारत पर ट्रंप की नाराजगी

मंगलवार रात अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने व्यापारिक शुल्कों को लेकर फिर एक बार अपने पुराने आरोपों को दोहराया. उन्होंने कहा कई देश हमसे भारी शुल्क वसूलते हैं जबकि हम उन पर कम टैक्स लगाते हैं. यह बहुत अन्यायपूर्ण है. भारत हमारे वाहनों पर 100% से अधिक शुल्क लगाता है. चीन भी हमारे उत्पादों पर हमसे दोगुना शुल्क लगाता है. यह दोस्त और दुश्मन सभी कर रहे हैं. 100 मिनट लंबा यह भाषण, अमेरिकी कांग्रेस के इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति का सबसे लंबा भाषण माना जा रहा है. ट्रंप ने इसमें अपने “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया, जिसे उनके समर्थकों ने सराहा, लेकिन लिबरल आलोचकों ने इसे झूठ और अतिशयोक्ति से भरा बताया.

भारत की तुलना चीन और मैक्सिको से

ट्रंप ने भारत को उन देशों के साथ रखा जिनका अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष अधिक है. लेकिन वास्तविक आंकड़े बताते हैं कि भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 45 अरब डॉलर है, जो कि चीन के 300 अरब डॉलर और मैक्सिको के 120 अरब डॉलर की तुलना में कहीं कम है. इसके अलावा, अमेरिका का आयरलैंड और वियतनाम के साथ व्यापार घाटा भी भारत से अधिक है. व्यापार संतुलन के मामले में, इंडोनेशिया और थाईलैंड की स्थिति भी भारत से ज्यादा प्रभावित करने वाली है. इसके बावजूद, ट्रंप ने भारत को निशाने पर लिया.

US India trade : चीन का अमेरिका को सख्त चेतावनी

ट्रंप ने चीन पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वह अमेरिका में अवैध ड्रग्स भेजने में मदद कर रहा है. इस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर अमेरिका वास्तव में फेंटानिल (opioid) संकट को हल करना चाहता है, तो उसे बराबरी, सम्मान और आपसी लाभ के आधार पर चीन से बातचीत करनी चाहिए. लेकिन अगर अमेरिका का कोई और एजेंडा है और वह किसी भी तरह की जंग चाहता है—चाहे वह टैरिफ वॉर हो, ट्रेड वॉर हो या कोई और युद्ध, तो हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं. चीन के वॉशिंगटन स्थित दूतावास ने भी सोशल मीडिया पर इस बयान को साझा किया.

मैक्सिको और कनाडा ने भी किया ट्रंप के आरोपों का खंडन

ट्रंप ने मैक्सिको पर आरोप लगाया कि वह फेंटानिल तस्करी में मदद कर रहा है. इसके जवाब में मैक्सिको ने पलटवार किया और कहा कि हम भी अमेरिका से आने वाले अवैध हथियारों की वजह से हिंसा का शिकार हो रहे हैं. कनाडा ने भी ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके फेंटानिल तस्करी के दावे पूरी तरह झूठे और निराधार हैं.

ट्रंप का नया व्यापार शुल्क और वैश्विक मंदी की आशंका

ट्रंप ने घोषणा की कि 2 अप्रैल से सभी देशों पर पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariffs) लागू किए जाएंगे. इस पर इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) ने गहरी चिंता व्यक्त की है. आईसीसी के उप महासचिव एंड्रयू विल्सन ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि यह कदम 1930 के दशक की तरह व्यापार युद्ध (Trade War) को जन्म दे सकता है और दुनिया को भारी मंदी की ओर धकेल सकता है. वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि अक्सर मैं वॉल स्ट्रीट जर्नल से सहमत नहीं होता, लेकिन डोनाल्ड, उन्होंने सही कहा कि भले ही आप बहुत चतुर व्यक्ति हों, लेकिन यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण निर्णय है.

US India trade : 21 मिलियन अवैध प्रवासी अमेरिका में घुसे

ट्रंप ने अपने भाषण में अवैध प्रवासियों को लेकर भी कई विवादित बयान दिए. उन्होंने कहा कि जो बाइडेन की खुली सीमा नीति की वजह से 21 मिलियन अवैध प्रवासी पिछले चार वर्षों में अमेरिका में घुस आए हैं. इनमें से कई हत्यारे, मानव तस्कर और अपराधी हैं. लेकिन हम इन्हें निकाल रहे हैं और बहुत तेजी से निकाल रहे हैं. हालांकि अमेरिकी थिंक टैंक और स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार, अमेरिका में दशकों से अवैध प्रवासियों की कुल संख्या 12 मिलियन के आसपास है. डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान और उनकी टैरिफ नीति (US India trade ) न केवल अमेरिका के व्यापारिक भागीदारों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि इससे वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है. भारत और अन्य देशों पर लगाए गए नए शुल्क से दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है. अब देखने वाली बात यह होगी कि ट्रंप की नीतियों का अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है.

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