North sentinel island : अगर आपको बताया जाए कि भारत में ऐसी जगह है. जहां किसी के भी जाने पर रोक है. वहां न सरकारी अफसर जाते हैं. न ही कोई उद्योगपति. न ही आर्मी और न ही पुलिस. यह किंग कॉन्ग फिल्म के स्कल आइलैंड की तरह है. जहां से वापस आना नामुमकिन माना जाता है. इस द्वीप का नाम है नार्थ सेंटिनल आइलैंड है. ये देश के अंडमान द्वीप समूह में स्थित है. आसमान से देखने पर यह द्वीप किसी भी आम द्वीप की तरह एकदम शांत हरा भरा और खूबसूरत दिखाई देता है. लेकिन फिर भी यहां कुछ ऐसा है. जिससे ना तो पर्यटक और ना ही मछुआरे वहां जाने की हिम्मत जुटा पाते हैं.
बाहरी दुनिया से क्यों डरती है रहस्यमय जनजाति ?
प्रशांत महासागर के नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड पर एक ऐसी आदिम जनजाति रहती है. जिसका आधुनिक युग से कोई लेना- देना नहीं है. वह ना तो किसी बाहरी व्यक्ति के साथ संपर्क रखते हैं और ना ही किसी को संपर्क रखने देते हैं. जब भी उनका सामना किसी बाहरी व्यक्ति(north sentinel island) से होता है तो वे हिंसक हो उठते हैं और घातक हमले करते हैं. साल 2006 में कुछ मछुआरे गलती से इस आइलैंड पर पहुंच गए थे. इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते. उन्हें अपनी जान गवांनी पड़ी.
north sentinel island : 60,000 साल पुराना है जनजाति का अस्तित्व
इस जनजाति के लोग आग के तीर चलाने में माहिर माने जाते हैं. इसलिए अपनी सीमा क्षेत्र में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों पर भी इन गोलों से हमले करते हैं.बंगाल की खाड़ी में बसा ये द्वीप भारत का ही हिस्सा है. लेकिन यह हमेशा से ही ऐसी पहेली बना रहा है. जिसे कोई भी सुलझा नहीं पाया. ऐसा माना जाता है. कि इस द्वीप पर रहने वाली जनजाति का अस्तित्व 60,000 साल पुराना है.
north sentinel island : पाषाण काल की जनजाति
लेकिन वर्तमान में इस जनजाति की जनसंख्या कितनी है. इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. ये लोग किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते. इसलिए इनके बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी जैसे इनके रिवाज, इनकी भाषा, इनका रहन-सहन आदि की किसी को नहीं है. साल 2004 में आई भयंकर सूनामी के बाद अंडमान द्वीप तबाह हो गए थे. यह द्वीप भी अंडमान द्वीपों की श्रृंखला का ही हिस्सा है. लेकिन सुनामी का इस जनजाति के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा. ये बात भी अभी तक कोई नहीं जान पाया है. सुनामी के बाद जब भारतीय तटरक्षक दल ने वहां जाने का प्रयास किया तो इन लोगों ने हेलिकॉप्टरों पर आगे के तीर से हमले किए. जिसके बाद वहां पहुंचने के प्रयास रोक दिए गए.
अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देती है भारत सरकार
इस जनजाति के लोगों को पाषाण काल की जनजाति भी कहा जाता है. क्योंकि तब से लेकर अब तक इनके भीतर किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आया है. यह जनजाति विश्व की सबसे ज्यादा खतरनाक और बेहद अलग-थलग रहने वाली जनजाति है. इतना ही नहीं यह एकमात्र ऐसी जनजाति है, जिनके जीवन या अंदरूनी मामलों में भारत सरकार भी दखल नहीं देती है. भारत सरकार ने कई प्रयास किए ताकि इस जनजाति के लोगों के हितों के लिए काम किया जाए और इनके जीवन को सुधारा जाए. लेकिन संभव नहीं हो पाया.
आदिवासी जनजातियों (north sentinel island) के लिए ही काम करने वाली सर्वाइवल इंटरनेशनल नामक संस्था का कहना है कि नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली जनजाति, इस ग्रह की सबसे कमजोर जनजाति है. उनके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता लगभग ना के बराबर है. मामूली सी बीमारी की वजह से भी उनकी मौत हो सकती है. अंडमान और निकोबार प्रशासन ने 2005 में कहा था कि उनका सेंटीनेलिस की जीवनशैली या आवास में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है और वे उनके साथ आगे संपर्क करने या द्वीप पर कानून लागू करने में रुचि नहीं रखते.