Shaniwar Wada : भारत समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास के लिए जाना जाता है. यहां कई खूबसूरत स्मारक हैं. कुछ स्मारक ऐतिहासिक शासकों के विश्राम स्थल हैं. जबकि कुछ प्राचीन काल के महान सम्राटों के सम्मान में बनाए गए हैं. भारत में मौजूद अद्वितीय स्मारकों में प्रत्येक शासक का एक अच्छा योगदान देखने को मिल जाएगा. लेकिन इस जगह की दिलचस्प बात ये है कि यहां लोगों को असामान्य गतिविधियां देखने को मिलती रहती हैं.
क्या है Shaniwar Wada
भले ही अन्य लोग शनिवार वाड़ा के बारे में न जानते हों, लेकिन मराठी लोग इसके बारे में बखूबी जानते हैं. दरअसल, यह एक एतिहासिक महल है, जो कभी मराठा साम्राज्य की आन-बान और शान हुआ करता था. लेकिन आज से करीब 246 साल पहले इस महल में एक ऐसी घटना घटी. जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है. इस घटना की वजह से ही लोग इस महल को रहस्यमय मानते हैं. तो चलिए जानते हैं शनिवार वाड़ा की वो रहस्यमय कहानी. जो लोगों को आज भी डराती है. शनिवार वाड़ा महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है. जिसका निर्माण मराठा-पेशवा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले बाजीराव पेशवा ने करवाया था.
कब और किसने बनाया था शनिवार वाड़ा
साल 1732 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था. कहा जाता है कि उस समय इसे बनाने में करीब 16 हजार रुपये खर्च हुए थे. तब के समय में यह राशि बहुत अधिक थी. उस समय इस महल में करीब 1000 लोग रहते थे.कहते हैं कि इस महल की नींव शनिवार के दिन रखी गई थी. इसी वजह से इसका नाम ‘शनिवार वाड़ा’ पड़. करीब 85 साल तक यह महल पेशवाओं के अधिकार में रहा था. लेकिन 1818 ईस्वी में इसपर अंग्रजों ने अपना अधिकार जमा लिया. और भारत की आजादी तक यह उनके ही अधिकार में रहा.कहते हैं कि इसी महल में 30 अगस्त 1773 की रात 18 वर्षीय नारायण राव की षडयंत्र कर हत्या कर दी गई थी. जो मराठा साम्राज्य के नौवें पेशवा बने थे. कहा जाता है कि उनके चाचा रघुनाथ राव ने ही उनकी हत्या करवाई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी अमावस्या की रात महल से किसी की दर्द भरी आवाज सुनाई देती है. जो बचाओ-बचाओ चिल्लाती है.
Shaniwar Wada से जुड़ा रहस्य
शनिवार वाड़ा से जुड़ा एक और रहस्य है. जो आज तक अनसुलझा है. साल 1828 में इस महल में भयंकर आग लगी थी. जो सात दिनों तक जलती रही थी. इस वजह से शनिवार वाड़ा अब खंडहर हो गया. कई स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कभी-कभी युवा पेशवा की चीख काका माला वछवा (चाचा मुझे बचाओ) सुनते हैं. आज के समय का शनिवार वाड़ा किले की संरचना खंडहर है. जिसके पांच दरवाजे बचे हुए हैं. जो दिल्ली दरवाजा, खिडकी दरवाजा, गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा और मस्तानी दरवाजा के नाम से जाने जाते हैं.
किले में प्रवेश सख्त वर्जित है
शाम 6:30 बजे के बाद किले में प्रवेश सख्त वर्जित है. दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और प्रियंका चोपड़ा अभिनीत प्रसिद्ध ब्लॉकबस्टर फिल्म बाजीराव मस्तानी एक प्रसिद्ध पेशवा बाजीराव और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी के इतिहास पर आधारित थी. शूटिंग इसी शनिवार वाड़े में हुई है. फिल्म के बाद, स्मारक को देखने के लिए पर्यटन में वृद्धि देखने को मिली है. पुणे हवाई अड्डा शनिवार वाडा से 12 किमी की दूरी पर स्थित है.