PM के बदले CM वाली डील…! राहुल को प्रधानमंत्री बताने वाले तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाएगी कांग्रेस

Bihar Chunav 2025 : जून 2023 में पटना में हुई विपक्षी दलों की एक बैठक के दौरान लालू प्रसाद यादव ने राहुल गांधी को दूल्हा कहकर संबोधित किया था. लालू ने कहा था कि राहुल जी! आप दूल्हा बनने की तैयारी कीजिए, हम बारात जाने की तैयारी में हैं. लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रही कांग्रेस समेत अन्य सभी विपक्षी दलों को  लालू यादव यह संदेश देना चाह रहे थे कि वो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में INDIA गठबंधन का चेहरा बनाने के पक्ष में है. इस बयान के लगभग 2 साल वाद एक बार फिर से राजद ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया है. लेकिन जितना सरल यह समर्थन लगता है उतना नहीं हैं. इसके दो कारण है पहला तो ये कि बिहार में चुनाव होने है और दूसरा इस बार यह समर्थन लालू यादव के राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने दिया है.

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू कभी नहीं चाहेंगे कि राहुल गांधी बिहार में कांग्रेस को ज्यादा मजबूत करें,क्योंकि इससे उनके बेटे तेजस्वी यादव और RJD पर दबाव बढ़ेगा। कांग्रेस पहले से ही झारखंड में RJD की सीटें कम कर चुकी है। तो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को सीधी टक्कर देने लिए राजद के पास कांग्रेस के अलावा विकल्प भी नहीं है. दरअसल कांग्रेस और राजद वो तलवार है जो एक म्यान में नहीं रह सकता,लेकिन प्रस्थिति ही कुछ ऐसी है कि दोनों एक दूसरे के लिए जरूरी बने हुए है.

चलिए थोड़ा और विस्तार से समझते हैं…ज्ञात हो कि बिहार में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के तीसरे दिन, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक बड़ा बयान दिया, अपने बयान में  तेजस्वी यादव ने 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया। साथ ही,उन्होंने ये भी कहा कि 2025 में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी और 2029 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे। तेजस्वी का यह ऐलान महागठबंधन की ताकत और संभावनाओं को एक नई दिशा देने के रूप में देखा जा सकता है,लेकिन इससे कुछ सवाल भी खड़े हुए हैं. जिनकी अनदेखी करना राजनीतिक  लिहाज से मुश्किल है।

पहला सवाल तो यही है कि क्या कांग्रेस और राजद में PM के बदले CM वाली डील हुई है…अगर हां तो एक तरफ जहां राजद ने 2029 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का ऐलान कर दिया तो महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरे के लिए तेजस्वी के नामों पर आधिकारिक चुप्पी क्यों? हालांकि तेजस्वी यादव ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा वही होंगे,लेकिन महागठबंधन के दूसरे सहयोगियों द्वारा ऐसा कुछ नहीं कहा गया है. हो सकता है कि यह सीट शेयरिंग के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं का असर है,या फिर कांग्रेस महागठबंधन में अपनी स्थिति को लेकर अभी भी संशय में है?

बता दें कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन महज 19 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। कांग्रेस का यह प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और इसी कारण तेजस्वी यादव की सरकार बनाने की उम्मीदों को झटका लगा था। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव  में महागठबंधन के उम्मीदों को कुछ हद तक राजद के अलावा दूसरे सहयोगियों ने बचाए रखा.ऐसे में  2025 में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस की भूमिका अब महत्त्वपूर्ण बन चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार आरजेडी चाहती है कि 2020 के मुकाबले कांग्रेस को कम सीटें दी जाएं, जबकि कांग्रेस कम से कम उतनी सीटों की दावेदारी कर रही है,जितनी उसने 2020 में लड़ी थी। तो क्या राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में INDIA गठबंधन का चेहरा बनाने के ऐलान के बाद कांग्रेस  तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार होने का घोषणा करेगी.

उधर बीते दिनों शुरू हुई वोटर अधिकार यात्रा के शुरूआती पलों का तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, उसमें तेजस्वी ही जीप की स्टीयरिंग व्हील थामे हुए थे, जबकि राहुल गांधी उनके साथ यात्रा में सवार थे। यह तस्वीर साफ तौर पर यह संदेश देती है कि भले ही राहुल गांधी राष्ट्रीय नेता हों, लेकिन बिहार में सत्ता की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है। यह संकेत भी दिया जा रहा है कि कांग्रेस को आरजेडी के नेतृत्व में ही बिहार में चुनाव लड़ना होगा। तीन दशकों से यह गठबंधन यही संदेश दे रहा है कि आरजेडी ही बिहार में सबसे मजबूत पार्टी है और कांग्रेस को उसी के नेतृत्व में काम करना पड़ेगा।

अब, जब महागठबंधन की सीट शेयरिंग को लेकर कई राउंड की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है, यह स्थिति असमंजस की ओर इशारा करती है। तेजस्वी यादव, हालांकि, बार-बार यह साफ कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री चेहरे के मामले में कोई संदेह नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है और चुनावी मैदान में तेजस्वी का नाम मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में घोषित करने में फिलहाल संकोच कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस इस समय वेट एंड वॉच रणनीति पर चल रही है, यानी सीट बंटवारे को लेकर आरजेडी से संतोषजनक प्रस्ताव मिलने का इंतजार कर रही है। जब तक कांग्रेस को अपनी स्थिति के अनुरूप सीटों का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वह तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आधिकारिक रूप से घोषित करने से बच सकती है।

यह राजनीतिक अनिश्चितता और कुचली हुई रिश्तों की तस्वीर महागठबंधन के भीतर एक नई चुनौती खड़ी करती है। अगर कांग्रेस को मनमाफिक सीट नहीं मिलती, तो यह महागठबंधन के भीतर की दरार को और भी गहरा कर सकता है। यही कारण है कि तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी के बीच, भले ही एकजुटता दिखाई दे रही हो, लेकिन भीतर की राजनीति कहीं न कहीं खींचतान का शिकार हो सकती है।

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