गुजरात से दिल्ली तक एक साथ तय किया सफर 30 सालों की मित्रता का राज आखिर क्या है?

Politics: देश की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की केमिस्ट्री हमेशा से चर्चा का विषय रही है. बीजेपी में इन दोनों नेताओं की ताकत को लेकर कोई दो राय नहीं है पार्टी के सभी अहम फैसलों में इनकी सक्रिय भूमिका देखने को मिलता हैं. आरएसएस से लेकर बीजेपी में आने तक का उनका सफर लगभग एक जैसा ही रहा.

हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में अमित शाह ने पहली बार बताया कि कैसे उनकी और पीएम मोदी की दोस्ती शुरू हुई थी. उन्होंने अपनी व्यक्तिगत यादों को साझा करते हुए इस रिश्ते की गहराई को बयां किया.

80 के दशक में अहमदाबाद में हुई थी पहली मुलाकात

आज तक को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बताया उन्होंने कहा कि 80 के दशक में नरेंद्र मोदी आरएसएस के लिए काम करते थे, तभी एक कार्यक्रम के लिए वह अहमदाबाद आए. वह कार्यक्रम युवाओं को लेकर था और उसी का हिस्सा अमित शाह खुद भी थे. शाह के मुताबिक उस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बहुत कम समय में संघ के सिद्धांतों से लेकर देश को बदलने की दिशा तक सब कुछ समझा दिया था. उनके शब्दों में एक ऐसी ताकत थी जो युवाओं को प्रेरित कर देती थी उसी दिन समझ गया था कि यह इंसान अलग है.

गुजरात BJP में कैसे बने चाणक्य चंद्रगुप्त की जोड़ी?

जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुजरात बीजेपी में सक्रिय हुए, तो राजनीतिक विशेषज्ञों ने उनकी तुलना प्राचीन भारत के महान रणनीतिकार चाणक्य और सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से की. जैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त को एक महान शासक बनने में अपनी रणनीतिक बुद्धि का इस्तेमाल किया था. वैसे ही अमित शाह ने मोदी की राजनीतिक यात्रा में एक कुशल रणनीतिकार की भूमिका निभाई

गुजरात में जब मोदी मुख्यमंत्री बने तो अमित शाह उनके सबसे भरोसेमंद सलाहकार और रणनीतिकार के रूप में उतरे दोनों ने मिलकर गुजरात की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा शाह की चुनावी रणनीति और मोदी के नेतृत्व कौशल ने एक अजय कांबिनेशन बनाया.

2014 से अब तक राष्ट्रीय स्तर पर सफलता

2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में ऐसी चुनावी रणनीति बनाएं की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला तब से लेकर अब तक दोनों नेताओं ने साथ मिलकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए अनुच्छेद 370 खत्म करना, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का पारित होना, राम मंदिर निर्माण, और G20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी जैसे अहम मुद्दों पर दोनों की एकजुट साफ दिखी हैं.

2025 में जब पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में है, और अमित शाह देश के गृह मंत्री है तो उनका रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दिखता है. कैबिनेट मीटिंग से लेकर पार्टी की रणनीति तक दोनों की सोच में अद्भुत तालमेल दिखाई देता है .

विपक्षी नेता भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि मोदी शाह की,यह जोड़ी भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावी और एकजुट टीम है.

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